विष्णु नागर
राजनैतिक व्यंग्य-समागम
नैतिकता अमर रहे!
स्मार्ट हलचल|हम दुनिया के परम नैतिक लोग हैं। इतने नैतिक कि दुनिया के इतिहास में इतना नैतिक शायद ही कोई हुआ हो! हमारे प्रधानमंत्री स्वयं में नैतिकता के अद्भुत प्रतिमान हैं। वे गांधी जी से चार कदम आगे हैं, मगर डोनाल्ड ट्रंप जी से तीन कदम और नेतन्याहू से दो कदम पीछे हैं! ऐसा प्रधानमंत्री सदियों में किसी-किसी देश को मिलता है और इक्कीसवीं सदी में यह हमें मिला है! वैसे भी जो नान-बायोलॉजिकल होता है, वह आटोमेटिकली नैतिक होता है! समस्या बायोलॉजिकल्स के सामने आती है, मगर वह समस्या भी समस्या नहीं रहती, क्योंकि नेतृत्व ऐसे नान-बायोलॉजिकल अवतारी पुरुष के हाथ में है, जिसे ईश्वर ने भारत भूमि पर नैतिकता की पुनर्स्थापना के विशेष उद्देश्य से भेजा है। और इस आदेश के साथ भेजा है कि जब तक नैतिकता की प्राण-प्रतिष्ठा न हो जाए, तब तक किसी भी कीमत पर भारत भूमि नहीं छोड़ना है, चाहे सदियां बीत जाएं! चाहे प्रलय आ जाए, धरती ऊभ-चूभ हो जाए!
हां तो जी, हम परम नैतिक लोग हैं। हमारे यहां प्रधानमंत्री ही नहीं, उनकी सारी सरकार चाल, चरित्र और चेहरे से संपन्न है। ऐसी सरकार दुनिया में पहले कभी नहीं हुई, आगे भी कभी नहीं होगी, आज और अभी है! यही कारण है कि एपस्टीन सेक्स फाइल पर पूरी दुनिया में हंगामा मचा हुआ है, हमारे यहां नहीं मचा, क्योंकि हमारा नेतृत्व परम नैतिक प्रधान सेवक के हाथ में है! नैतिकता इस बात की अनुमति नहीं देती कि ऐसी टुच्ची बातों पर हंगामा किया जाए!
नार्वे के पूर्व प्रधानमंत्री थोरब्योर्न जगलैंड ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगने पर और उनके घर पर छापा पड़ने पर शर्म के मारे आत्महत्या करने की कोशिश की, क्योंकि भौतिकतावादी पश्चिमी देशों ने कभी चाल, चरित्र और चेहरे के महत्व को नहीं समझा, उन्होंने कभी नागपुर को सेवा तीर्थ नहीं समझा! समझा होता, तो ये नौबत उनके सामने नहीं आती। हमारे यहां और जो भी आत्महत्या कर ले, नेता नहीं करता! वह हत्या और आत्महत्या करवाने की क्षमता से लैस होता है, वह आत्महत्या नहीं करता! ऐसा चलन अगर हमारे यहां होता, तो देश नेताओं से करीब-करीब खाली हो जाता! हमारे यहां नेता पर जो भी आरोप लग जाएं, वे सिद्ध भी हो जाएं, उसकी चाहे जो फाइल खुल जाए, वह अपने पथ से नहीं डिगता! वह जानता है कि फाइल बंद होने के लिए है,खोने के लिए है, रिकार्ड रूम में आग लगने पर जल जाने के लिए है!उसका कोई भी अपराध तब तक अपराध नहीं है, जब तक अपराधी नैतिकता के अलंबरदार की नुमाइंदगी स्वीकार करने को तैयार है! हर फाइल को बंद करवाने की एक कीमत है और नष्ट करवाने की दूसरी कीमत है।वह दो और फिर सच्चरित्र का प्रमाण पत्र ले जाओ! और अगर सीना छप्पन इंच का है, तो उसे 106 इंच तक फुलाकर आराम से छाती के बटन खोलकर चलो।और अकेले मत चलो, अपने पीछे पूरी बारात लेकर ठसके से मालाएं गले में लाद कर आगे-आगे चलो! किसी के पिताजी के पिताजी के दादाजी में भी हिम्मत नहीं कि रोक-टोक सके! रोकेगा तो हड्डियां अपनी तुड़वाएगा, 106 इंची का बाल भी बांका नहीं होगा! इसका कारण यह है कि हम दुनिया के परम नैतिक लोग हैं, जो परम नैतिक सरकार के चरम नैतिक मुखिया के नेतृत्व में विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर हैं!
चाल, चरित्र और चेहरे में से एक भी चीज़ जगलैंड जी के पास भी होती, तो पूर्व प्रधानमंत्री होकर वह ऐसी घटिया हरकत कदापि नहीं करते, भाजपा की वाशिंग मशीन में धुल कर सच्चरित्र होकर निकलते! कोई बड़ी बात नहीं हुई थी, फाइल में उनका नाम ही आया था न, भ्रष्ट होना ही साबित हुआ था न! इतने से ही वह इतने अधिक घबरा गए, जबकि हमारे यहां भ्रष्ट और एपस्टीनी होने पर नेता पुरस्कृत होते हैं! हम सनातनी हैं, हमें भ्रष्टाचार जैसी भौतिकताएं छू भी नहीं पातीं!
दुनिया के दस देशों के 15 से अधिक बड़े पदों पर बैठे लोगों को पद छोड़ना पड़ा, ब्रिटेन के पूर्व राजकुमार एंड्रयू तक को ग्यारह घंटे तक जेल की हवा खानी पड़ी, प्रधानमंत्री स्टार्मर को एपस्टीन कांड में ब्रिटेन के बड़े लोगों के शामिल होने पर माफी मांगनी पड़ी। बिल गेट्स ने दो रूसी महिलाओं के साथ संबंध होना स्वीकार कर लिया मगर परम नैतिक लोगों के परम नैतिक प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कुछ नहीं हुआ। पेड़ जोर-जोर से हिलाने की कोशिश विपक्ष ने की, मगर पत्तों ने हिलने से मना कर दिया! हिलाने वाले हार थककर लौट गए। जिन मंत्री जी का नाम आया, वह पहले की तरह दनदना रहे हैं, बल्कि पहले से ज्यादा फनफना रहे हैं, क्योंकि अमेरिका की इतनी कुख्यात फाइल में नाम आ जाना जीवन की कोई छोटी उपलब्धि नहीं है! अनिल अंबानी की सेहत पर फर्क तो पड़ा है, मगर इस वजह से बिलकुल नहीं पड़ा। जालसाजी की वजह से थोड़ा अंतर पड़ा, पर थोड़ा वक्त बीत जाने दीजिए, उनका भी सब ठीक हो जाएगा! नैतिकता का पालन करने वाले इस देश में अदालत से भी एक दिन वह परम नैतिक होने का प्रमाणपत्र ले आएंगे!
इस समय हमारे देश में राज चल रहा है। चाल, चरित्र और चेहरे की महत्ता बेहद बढ़ गई है। भारत, नेहरू युग से नैतिकता में बहुत आगे निकल आया है। तब कलयुग था, अब सतयुग आ चुका है! जल्दी ही त्रेतायुग भी पधार जाएगा!
हमारे यहां सब कुछ नैतिक है। चोरी करना भी नैतिक है, बलात्कार करना भी नैतिक है। हत्या करना भी नैतिक है।हमारी अदालतों पर भ्रष्टाचार का एक दाग तक नहीं चिपका है। चिपका होता, तो हमारे चीफ जस्टिस साहब और प्रधानमंत्री इतने सख्त नहीं हो जाते कि एनसीईआरटी के प्रमुख थर-थर कांपने लग जाते! हम नैतिक हैं, इसलिए राहुल गांधी के खिलाफ देश भर की अदालतों में 32 मुकदमे चल रहे हैं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने नैतिकता के सर्वोच्च मानदंड स्थापित करते हुए अपने विरुद्ध सभी मुकदमे वापस ले लिये हैं! हमारे बाबा तक इतने नैतिक हैं कि हत्या और बलात्कार करके जब चाहते हैं, बाहर आ जाते हैं। आज चाहें, तो आज बाहर आ जाएं! हम इतने नैतिक हैं कि नागपुरी संतरे हैं।हम इतने नैतिक हैं कि मुसलमान की चाय की दुकान मंगलवार को चलने नहीं देते, क्योंकि वह हनुमान जी का दिन होता है और हम इतने नैतिक हैं कि अडानी की झोली इतनी ज्यादा भर देते हैं कि अमेरिकी अदालत जब उसमें छोटा-सा सुराख कर देती है, तो हमारे नैतिक परमाचार्य जी उसे सी कर ठीक कर देते हैं। हम इतने नैतिक हैं कि दुनिया भर में पेगासस जासूसी उपकरण पर तहलका मचता है और यहां मचकर भी नहीं मचता, क्योंकि यहां टीवी चैनल भी नैतिक हैं, अखबार भी नैतिक हैं, सीबीआई भी नैतिक है, अदालत भी नैतिक हैं और जो भी अनैतिक है, सब अंदर जा चुके हैं और जो अभी बचे हुए हैं,अंदर कर दिए जाएंगे। हमारे यहां सबकुछ बर्दाश्त किया जा सकता है, अनैतिकता नहीं!
नैतिकता अमर रहे!
*2. मोदी जी का मास्टर स्ट्रोक ही मास्टर स्ट्रोक! : राजेंद्र शर्मा*
अब बोलें क्या कहते हैं, मोदी जी के मास्टर स्ट्रोक का मास्टर होने पर सवाल उठाने वाले। कम से कम मोदी जी के इज़रायल दौरे और ईरान पर इज़रायल के हमले की क्रोनोलॉजी सामने आने के बाद तो ऐसे सवाल उठाने वालों के मुंह बंद ही हो जाने चाहिए। आखिरकार, ऐसी कमाल की टाइमिंग किसी नेहरू, किसी इंदिरा की थी क्या? सिर्फ दो दिन का दौरा — 25 की सुबह रवानगी और 26 की शाम वापसी। और 28 की सुबह, ईरान पर इज़रायल का हमला चालू, बल्कि हमला भी कहां, महज ‘निवारक प्रहार’।
यानी लड़ाई की सारी तनातनी के बीचो-बीच, मोदी जी इज़रायल पहुंच भी गए, अपने पक्के दोस्त बीबी उर्फ नेतन्याहू से झप्पी-पप्पी भी कर ली, इज़रायल की संसद को सदा साथ देने का भरोसा भी दे दिया। और इससे पहले कि इज़रायल अपना हमला शुरू करता, लौटकर सुरक्षित घर भी आ गए।
बल्कि जब ईरान पर इज़रायल का हमला शुरू हुआ, तब तक तो मोदी जी अजमेर में कई सरकारी उद्घाटनों के साथ, अपने एआई ईवेंट का मजा किरकिरा करने वाले नौजवानों के बहाने, विरोधियों पर एक बार फिर हमला भी कर चुके थे। अगर तेल अवीव में मोदी जी का ‘‘डीयर फ्रेंड’’ अपने हमले में ईरान के तबाह हो जाने के दावे कर रहा था, तो अजमेर में नेतन्याहू का ‘‘ब्रदर’’ विपक्षी प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वालों की पीठ ठोक रहा था। मोदी जी ने ऐन मौके पर पहुंच कर नेतन्याहू के कान में जो शांति का मंत्र दिया था, वह युद्ध के मैदान में बखूबी काम कर रहा था — मंत्र पाने वाले पर ही नहीं, मंत्र देने वाले पर भी! घर में घुसकर मारने का शांति मंत्र है ही ऐसा!
लेकिन, यह विरोधियों का झूठा प्रचार है कि मोदी जी, ईरान पर हमले के लिए ‘‘डीयर फ्रेंड’’ को अपना समर्थन देने के लिए ही दौड़े-दौड़े इज़रायल गए थे। सोचने की बात है, समर्थन देने के लिए मोदी जी को निजी हवाई जहाज लेकर, दौड़े-दौड़े तेल अवीव जाने की क्या जरूरत थी? डियर फ्रेंड चाहे वाशिंगटन में बैठता हो या तेल अवीव में, डीयर फ्रेंडों के लिए मोदी जी का समर्थन हमेशा ही बना रहा है। मोदी जी को कम से कम बार-बार मिलकर, अपने समर्थन का भरोसा दिलाने की जरूरत तो नहीं ही पड़ती है। फिर नेतन्याहू के ‘‘जो ठीक समझे करने’’ के लिए मोदी जी का समर्थन पिछले दो-ढाई साल से यानी हमास के सफाए के नाम पर फिलिस्तीनियों के सफाए की डियर फ्रेंड की मुहिम की शुरुआत से ही बना हुआ है।
और रही ईरान पर हमले की बात, तो पिछले साल भी तो इज़रायल ने ईरान पर हमला किया था, जिसके पीछे-पीछे अमेरिका ने भी हमला किया था। तब क्या मोदी जी ने इज़रायल को हमला करने से मना किया था? तब तो हमले से पहले मोदी जी को दौड़े-दौड़े इज़रायल जाने की जरूरत नहीं पड़ी थी। साफ है कि यह इल्जाम झूठा है कि हमले से ठीक पहले इज़रायल को समर्थन देने के लिए ही मोदी जी दौड़े-दौड़े तेल अवीव गए थे।
जाहिर है कि मोदी जी पर ऐसे इल्जाम लगाने वाले यह दिखाना चाहते हैं कि मोदी जी के दौरे से जो भी मिला है, इज़रायल को ही मिला है ; भारत को कुछ नहीं मिला है। सच पूछिए तो यह एक फैशन सा ही हो गया है, बल्कि यह भी एक अंतर्राष्ट्रीय षडयंत्री टूल किट का हिस्सा है कि मोदी जी जब भी किसी डियर फ्रेंड से मिलने जाते हैं, सोशल मीडिया में उनके गले पड़ने और खी-खी-खी करने के वीडियो चलाए जाते हैं और विरोधी सुर में सुर मिलाकर पूछने लगते हैं — इस दौरे से भारत को क्या मिला? इसीलिए तो मोदी जी जहां भी जाते हैं, जाने से पहले कोई न कोई सम्मान पाने का जुगाड़ जरूर बैठाकर जाते हैं। मोदी जी के सम्मान के बाद, विरोधियों के मुंह अगर बंद नहीं भी हो जाएं, तब भी कम से कम वे यह नहीं कह पाते हैं कि भारत को क्या मिला? सम्मान! सम्मान से बढ़कर, कोई विश्व गुरु को और दे भी क्या सकता है?
इस बार इज़रायल की यात्रा में तो मोदी जी ने कमाल ही कर दिया। यह तो मास्टर स्ट्रोक का भी मास्टर स्ट्रोक हो गया। मोदी जी सिर्फ सम्मान ही नहीं लेकर आए, वह एकदम नया-निकोरा सम्मान लेकर आए हैं। मोदी जी एक ऐसा सम्मान लेकर आए हैं, जो न उनसे पहले किसी को मिला है और न उनके बाद ही किसी को मिलने की संभावना है। मोदी जी विश्व में इस सम्मान को पाने वाले अकेले हैं और बीबी से दोस्ती बनी रहे, मोदी जी विश्व में इस सम्मान को पाने वाले अकेले ही बने रहेंगे। विरोधी जलते हैं, जो यह प्रचार कर रहे हैं कि इस डीयर फ्रेंड ने भी मोदी जी को सस्ते में निपटा दिया, बल्कि एक तरह से ठग ही लिया। पुरस्कृत करने का लालच देकर, लड़ाई छेड़ने से ठीक पहले बुला लिया, अपना समर्थन भी करा लिया और पुरस्कार के नाम पर, इज़रायल का सर्वोच्च सम्मान देने के बजाए, एक झूठा मैडल थमा दिया। पर सच पूछिए तो झूठा तो वह मैडल होता है, जो पहले किसी और को दिया गया हो, जिस पर पहले किसी और के हाथ लगे हों। नया-निकोरा मैडल, झूठा हो ही कैसे सकता है? बल्कि हम तो कहते हैं कि जो सम्मान पहले किसी को दिया जा चुका हो, उसे सर्वोच्च कहना ही गलत है? वहां तो बराबर में दूसरे लोग, पहले से बैठे हुए हैं। सम्मान तो नया निकोरा ही सर्वोच्च हो सकता है, वह भी तब, जब इसकी गारंटी हो कि आगे किसी को दिया भी नहीं जाएगा।
फिर मोदी जी इज़रायल से सिर्फ पुरस्कार थोड़े ही लेकर आए हैं? इज़रायली संसद का पुरस्कार याद रहा, पर संसद में मोदी जी का भाषण कैसे भूल गए — इज़रायल फादरलैंड एंड इंडिया मदरलैंड वाला भाषण। बेशक, भाषण दिया जाता है, पर उसमें बजी तालियां तो मोदी जी देश तक लेकर आए ही हैं। और पूर्व-सांसदों की मोदी-मोदी भी! माना कि विपक्ष का बहिर्गमन भी साथ आया है, पर एक नेहरू पछाड़ रिकार्ड भी तो मोदी ने अपने नाम करा लिया है बल्कि अपने से पहले के सभी प्रधानमंत्रियों को पछाड़ने वाला रिकार्ड। मोदी जी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिसने इज़रायल की संसद को संबोधित किया है और वह भी मोदी-मोदी कराने के साथ। सच पूछिए, तो यह तो विश्व रिकॉर्ड ही हो गया। ट्रंप के संबोधन के टैम पर भी ट्रंप-ट्रंप थोड़े ही हुआ था! वैसे लाने को तो मोदी जी पेगासस टाइप और भी कुछ न कुछ अपनी गुप्त जेब में डालकर लाए होंगे, पर राष्ट्र की और अपनी भी सुरक्षा की खातिर उसकी चर्चा हम नहीं करें, तो ही बेहतर है।
विश्व रिकॉर्ड बनाकर, एक नया पुरस्कार गढ़वा कर, अपनी शॉपिंग लिस्ट पहुंचाकर, लड़ाई छिड़ने से ऐन पहले मोदी जी सुरक्षित लौट आए, देश को यह हकीकत बताने कि उनसी1के एआई इवेंट में उनके भक्तों ने विरोध प्रदर्शन करने वालों पर जूते भी चलाए थे! यह मास्टर स्ट्रोक नहीं, तो और क्या है!?
*(व्यंग्यकार वरिष्ठ पत्रकार और साप्ताहिक समाचार पत्र ‘लोकलहर’ के संपादक हैं।)*
