बैंकर्स या मशीन?’ 6 दिन काम, छुट्टी में भी ड्यूटी; देर से पहुंचे तो ट्रांसफर की धमकी! फूटा गुस्सा — बोले, अब नहीं सहेंगे दबाव
5 डे बैंकिंग पर सरकार खामोश, बढ़ते काम और घटती राहत से बैंक कर्मचारियों का सब्र टूटा; महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल
राकेश मीणा
भीलवाड़ा@स्मार्ट हलचल|देश की बैंकिंग व्यवस्था को संभालने वाले बैंक कर्मचारी अब खुद को दबाव और अनिश्चितताओं के बीच घिरा हुआ महसूस कर रहे हैं। बढ़ते कार्यभार, छुट्टियों में भी काम का दबाव, ट्रांसफर की धमकियों और कथित नीतिगत भेदभाव को लेकर कर्मचारियों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। कर्मचारियों का कहना है कि बैंकिंग सिस्टम लगातार आधुनिक हो रहा है, लेकिन कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियां पहले से ज्यादा कठिन होती जा रही हैं।
‘छुट्टी भी अब छुट्टी नहीं’ — ऑफ डे में बुलावा, देर तक बैठाने के आरोप
कर्मचारियों का आरोप है कि छह दिन लगातार काम करने के बावजूद उन्हें छुट्टी के दिनों में भी काम के लिए बुलाया जाता है। कई शाखाओं में तय समय से ज्यादा देर तक रुकने का दबाव बनाया जाता है। देरी से आने या सवाल उठाने पर ट्रांसफर की धमकी दिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
5 डे बैंकिंग की मांग पर सालों से इंतजार
बैंक कर्मचारियों ने कहा कि अन्य क्षेत्रों में पांच दिन कार्य व्यवस्था लागू हो चुकी है, लेकिन बैंकिंग सेक्टर में यह मांग वर्षों से लंबित है। उनका कहना है कि 5 डे बैंकिंग लागू होने से कर्मचारियों को राहत मिलेगी और कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।
महिला कर्मचारियों की स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण
कर्मचारियों के अनुसार कई शाखाओं में महिला कर्मचारियों को देर रात तक रुकना पड़ता है और ऑफ डे में भी बुलाया जाता है, जिससे सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। उन्होंने सुरक्षित और संवेदनशील कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की।
ट्रांसफर नीति पर सवाल, उच्च प्रबंधन पर भेदभाव के आरोप
कर्मचारियों ने कहा कि सरकार की ट्रांसफर नीतियों का पालन सही तरीके से नहीं किया जा रहा और उच्च प्रबंधन द्वारा भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है।
स्वास्थ्य पर असर — गंभीर बीमारियों का खतरा
लगातार बढ़ते काम और मानसिक तनाव का असर कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है। कर्मचारियों का दावा है कि कई बैंकर्स गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, जो कार्य परिस्थितियों का परिणाम है।
8वें वेतन आयोग के बाद सैलरी सबसे कम होने का डर
कर्मचारियों ने आशंका जताई कि 8वें वेतन आयोग के बाद अन्य क्षेत्रों की तुलना में बैंक कर्मचारियों की सैलरी सबसे कम रह सकती है। उन्होंने वेतन संरचना में सुधार की मांग की।
10 लाख बैंकर्स और उनके परिवारों पर असर
देशभर में करीब 10 लाख बैंक कर्मचारी कार्यरत हैं और उनके परिवार भी इन परिस्थितियों से प्रभावित हो रहे हैं। कर्मचारियों ने कहा कि यह सिर्फ कर्मचारियों का नहीं बल्कि समाज और बैंकिंग व्यवस्था की स्थिरता का मुद्दा है।
पंचलाइन — ‘बैंक चलाने वालों को ही राहत नहीं, तो सिस्टम कैसे चलेगा?’
कर्मचारियों ने सरकार से गंभीरता से विचार कर जल्द ठोस निर्णय लेने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

