शाश्वत तिवारी
वागाडुगु। स्मार्ट हलचल|भारत ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (विश्व एक परिवार है) के अपने मूल दर्शन को चरितार्थ करते हुए पश्चिम अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में जल और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। भारत सरकार के वित्तीय सहयोग से नवनिर्मित ‘नियांगडो बांध’ का 27 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर उद्घाटन कर इसे स्थानीय अधिकारियों को सौंप दिया गया। इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन बुर्किना फासो में भारत के राजदूत ओम प्रकाश मीणा द्वारा किया गया, जो दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होती मित्रता का जीवंत प्रमाण है।
बुर्किना फासो स्थित भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर लिखा इस प्रोजेक्ट में भारत ने ‘इंडिया-यूएन डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड’ के माध्यम से 10 लाख अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया। 10 गांवों के 50,000 से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाने वाला यह बांध, जल और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करता है। भारत-बुर्किना फासो की दोस्ती, ‘साउथ-साउथ’ सहयोग, और सतत विकास तथा जलवायु लचीलेपन (क्लाइमेट रेजिलिएंस) के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने एक वीडियो संदेश में ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के साथ विकास साझेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा, ‘‘आज, भारत-संयुक्त राष्ट्र कोष की परियोजना ‘नियांगडो गांव में सतही जल का संचयन और मूल्यांकन’ को आधिकारिक तौर पर सौंप दिया गया। यह परियोजना 583,000 घन मीटर जल भंडार को संरक्षित करने, पानी की विश्वसनीय उपलब्धता सुनिश्चित करने और ग्रामीण आजीविका को बेहतर बनाने में मदद करेगी।
यह परियोजना केवल एक कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि सतत विकास और जलवायु लचीलेपन के प्रति भारत की दूरगामी सोच का प्रतीक है। जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित मानसूनी संकट से जूझ रहे अफ्रीकी भूभाग के लिए भारत का यह प्रयास एक रक्षा कवच की तरह है। यह बांध न केवल भारत-बुर्किना फासो के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर ‘साउथ-साउथ’ सहयोग के एक अनुकरणीय और आदर्श मॉडल के रूप में भी स्थापित होता है।