शाश्वत तिवारी
नई दिल्ली। भारत ग्लोबल साउथ (गरीब एवं विकासशील देश) के हितों को सुरक्षित करने और इसके चहुंओर विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। भारत के आर्थिक सहयोग से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में निर्मित काकोबोला जलविद्युत संयंत्र का उद्घाटन किया गया, जो दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सहयोग परियोजना है। वहीं दूसरी ओर पिछले दो दिनों के अंदर भारत ने ग्लोबल साउथ के दो देशों को मानवीय मदद भी भेजी है, जो वैश्विक दक्षिण के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कांगो स्थित भारतीय दूतावास ने एक ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा कांगो में भारत सरकार द्वारा समर्थित एलओसी परियोजना, काकोबोला जलविद्युत संयंत्र का उद्घाटन जल संसाधन और विद्युत मंत्री मोलेन्डो साकोम्बी ने किया। यह परियोजना क्विलु प्रांत के कस्बों को विश्वसनीय और सतत विद्युत आपूर्ति प्रदान करेगी। भारत-कांगो साझेदारी का प्रतीक यह परियोजना सतत विकास, स्वच्छ ऊर्जा और ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह भारत-कांगो साझेदारी में एक गौरवपूर्ण मील का पत्थर है।
भारतीय दूतावास ने एक अन्य पोस्ट में लिखा 10.5 मेगावाट की स्थापित क्षमता वाला यह प्रमुख ऊर्जा ढांचा ‘रन-ऑफ-रिवर’ जलविद्युत तकनीक पर आधारित है। इस संयंत्र के चालू होने से चार लाख से अधिक निवासियों को बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इस प्रकार यह स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के पुनरुद्धार, लघु एवं मध्यम उद्यमों के विकास, तथा स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में आवश्यक सामाजिक सेवाओं के सुधार में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
यह उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र को आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन का एक केंद्रीय वाहक बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह प्रतिबद्धता, पूरे देश में बिजली की पहुंच में सुधार लाने की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप है।
वहीं दूसरी ओर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक एक्स पोस्ट में बताया कि भारत की ग्लोबल साउथ के साथ साझेदारी अब ज़मीनी स्तर पर दिखने लगी है। उन्होंने लिखा भारत ने आज सिएरा लियोन की ‘स्कूल मिड-डे मील’ योजना में मदद के लिए 1,000 मीट्रिक टन चावल भेजा है। यह कदम ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और ‘सतत विकास लक्ष्यों’ को समर्थन देने की भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। उल्लेखनीय है कि इससे एक दिन पहले ही भारत ने मोज़ाम्बिक को विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 86 मीट्रिक टन आवश्यक दवाओं की खेप भी भेजी थी।
