बन्शीलाल धाकड़
प्रतापगढ़, स्मार्ट हलचल|भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के अंतर्गत भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर ), लुधियाना द्वारा संचालित परियोजना “इथेनॉल उद्योगों के जलग्रहण क्षेत्रों में मक्का उत्पादन में वृद्धि” के तहत आज राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के बरेवा & जवाहर नगर गांव में एक दिवसीय मक्का प्रशिक्षण दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ब्लॉक धरियावाद के गांव बलुआ व जवाहर नगर के 100 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. बी एल. रोत ने मक्का में कीट रोग प्रबंधन के जैविक तरीके बताते हुए मक्का की उन्नत खेती कर प्रति हेक्टर अधिक उत्पादन लेने हेतु प्रेरित किया ! आईआईएमआर के यंग प्रोफेशनल श्री शंकर लाल चौधरी ने कहा कि “मक्का अब केवल खाद्य फसल नहीं रही, बल्कि एक महत्वपूर्ण औद्योगिक फसल बन चुकी है। वर्तमान में भारत में लगभग 10–12 मिलियन टन मक्का का उपयोग इथेनॉल उत्पादन में किया जा रहा है, जिसे भविष्य में और बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो और देश की जैव-ईंधन नीति को मजबूती मिले। उन्होंने किसानों को उन्नत मक्का उत्पादन तकनीकों, विशेष रूप से खाद एवं सिंचाई प्रबंधन के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। इसके अलावा मक्का की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने में कटाई के बाद प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
परियोजना प्रबंधक व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस. एल. जाट ने अनुसार भारत सरकार की इथेनॉल नीति के कारण मक्का की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे वर्ष 2025–26 में देश का मक्का उत्पादन 50 मिलियन टन से अधिक होने का अनुमान है जिसमें राजस्थान राज्य की मुख्य भूमिका रहेगी। कार्यक्रम का संचालन अजय सेन ने किया!
