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लाखेरी की भोली भाली जनता के साथ कब तक अन्याय

जितेन्द्र गौड़

लाखेरी- स्मार्ट हलचल|बूंदी जिले का लाखेरी वर्तमान समय में अनेकों समस्याओं से जूझ रहा है, जो आमजन की मूलभूत सुविधाएं हैं, और लाखेरी कस्बा वर्षों से विकास की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करता रहा है। लेकिन आज भी यहां की बुनियादी व्यवस्थाएँ ऐसे सवाल खड़े कर रही हैं जिनका जवाब स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को जल्द देना होगा। शहर के हालात किसी भी तरह उस विकास की कहानी नहीं कहते जिसे काग़ज़ों में बार-बार दोहराया जाता है।
सबसे चिंताजनक स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की है। लाखेरी अस्पताल में महिला डॉक्टर का अभाव, शिशु रोग विशेषज्ञ की अनुपलब्धता, और डॉक्टरों की भारी कमी मरीजों पर सीधा असर डालती है। प्रसूता महिलाओं को नजदीकी क्षेत्रों में प्राथमिक इलाज तक न मिल पाना एक गंभीर प्रशासनिक विफलता है। एक ओर सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को गांव-कस्बों तक पहुँचाने का दावा करती है, वहीं लाखेरी में ऑपरेशन सुविधा बंद होने से छोटे–छोटे ऑपरेशन भी रेफर किए जा रहे हैं। यह स्थिति स्वीकार्य नहीं। कस्बे की सड़कों पर नजर डालें तो गड्ढों की भरमार किसी भी आगंतुक को यह बताने के लिए काफी है कि नगर पालिका की कार्यशैली कितनी सुस्त है। सफाई व्यवस्था भी इसी ढर्रे पर चल रही है। कई मोहल्लों में कचरे के ढेर और अस्वच्छता ने आमजन का जीवन दूभर कर दिया है। इसके साथ ही कोटा–दौसा मेगा हाईवे पर भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही ने दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा दिया है। हाईवे से जुड़े क्षेत्रों में लोगों का कहना है कि दिन-रात गुजरने वाले ट्रकों की रफ्तार और शोर शराबे ने जीना मुश्किल कर दिया है। स्पीड नियंत्रण, नियमित निगरानी और सुरक्षा उपाय न होने से यह मार्ग आमजन के लिए खतरा बन चुका है। इन सभी समस्याओं का सार यही है कि लाखेरी में प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी स्पष्ट दिखाई देती है। विकास योजनाएँ तभी सफल होती हैं जब उनकी जमीनी निगरानी ईमानदारी से की जाए। सिर्फ मीटिंगों, घोषणा पत्रों और सोशल मीडिया पर सक्रियता से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता; वास्तविक बदलाव तब होगा जब अस्पतालों में डॉक्टर होंगे, सड़कों पर गड्ढे नहीं, और हाईवे पर सुरक्षा होगी। लाखेरी एक संभावनाओं वाला कस्बा है लेकिन संभावनाएँ तभी चमकेंगी जब जिम्मेदार विभाग व जनप्रतिनिधि अपनी भूमिका गंभीरता से निभाएँ। अब समय आ गया है कि लाखेरी की समस्याओं को मुद्दों की तरह नहीं, बल्कि जनजीवन से जुड़े आवश्यक समाधान के रूप में देखा जाए। लाखेरी बदलाव मांग रहा है और यह मांग बिल्कुल जायज़ है। आखिर कब तक लाखेरी की जनता इन समस्याओं से जूझती रहेंगी। क्योंकि यहां की जनता सीधी साधी है, वह सब सहन कर रही है। यहां के सता एवं विपक्ष के जनप्रतिनिधि सब आमजन की मूलभूत सुविधाओं को जानकर भी अनजान बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन भी जनहित के कार्यों हेतु सुस्त है।

स्मार्ट हलचल न्यूज़ पेपर 31 जनवरी 2025, Smart Halchal News Paper 31 January 2025
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