आरणी में घर के बाहर खेल रहा था शिवम, स्कूल वाहन की चपेट में आने से गई जान, पहले हादसे के बाद सख्त जांच होती तो शायद बच जाती मासूम की जिंदगी
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल|शाहपुरा क्षेत्र में स्कूली बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरणी गांव में शनिवार सुबह स्कूल वाहिनी की टक्कर से दो वर्षीय मासूम शिवम गुर्जर की दर्दनाक मौत हो गई। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं और परिवार की आंखों का तारा बनकर घर-आंगन में किलकारियां भरते हैं, उसी उम्र में एक हादसे ने शिवम की जिंदगी छीन ली। इस घटना ने न केवल एक परिवार की खुशियां उजाड़ दीं, बल्कि स्कूल वाहनों की सुरक्षा और परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुकेश गुर्जर का दो वर्षीय बेटा शिवम शनिवार सुबह करीब 8.30 बजे आरणी गांव में खेल रहा था। इसी दौरान वह स्कूल वाहिनी की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर उसे भीलवाड़ा जिला चिकित्सालय रेफर किया गया, जहां ड्यूटी डॉक्टर ने एमओटी पर उसे मृत घोषित कर दिया। शाहपुरा थाना प्रभारी लीलाधर मालवीय के अनुसार, पुलिस ने मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया है।
पहले हादसे के बाद भी नहीं बदले हालात?
शाहपुरा में स्कूल वाहिनी से जुड़ा यह पहला हादसा नहीं है। विगत दिनों भी स्कूल वाहन से दुर्घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की थी। उस समय यदि क्षेत्र में संचालित सभी स्कूल वाहनों की व्यापक जांच की जाती और नियमों की पालना सुनिश्चित कराई जाती, तो शायद सुरक्षा व्यवस्था में सुधार हो सकता था। हालांकि, यह कहना अभी संभव नहीं है कि मौजूदा हादसा जांच या कार्रवाई से निश्चित रूप से टल जाता, लेकिन लगातार सामने आती घटनाएं नियमित निगरानी की जरूरत जरूर बताती हैं।
गांवों से बच्चों को लाने वाले वाहनों की जांच जरूरी
शाहपुरा क्षेत्र में पंजीकृत स्कूल वाहनों के साथ निजी तौर पर छोटे वाहनों को स्कूली परिवहन में इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या सभी वाहनों के दस्तावेज, फिटनेस, परमिट, बीमा और चालकों की पात्रता की नियमित जांच हो रही है? परिवहन विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि क्षेत्र में कितने स्कूल वाहन पंजीकृत हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
अब कार्रवाई नहीं, जवाबदेही भी जरूरी
शिवम की मौत के बाद केवल औपचारिक जांच या कुछ दिनों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। परिवहन विभाग, पुलिस और शिक्षा विभाग को संयुक्त अभियान चलाकर स्कूली वाहनों की जांच करनी चाहिए। स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा में कोई समझौता न हो।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मासूमों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन कब स्थायी व्यवस्था करेगा? शिवम की मौत एक परिवार का असहनीय दुख है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना प्रशासन और संबंधित संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। अब जरूरत है कि हादसे के बाद जागने के बजाय व्यवस्था पहले से सतर्क रहे, ताकि किसी और घर का चिराग इस तरह न बुझे।