ह्यूमन ट्रैफिकिंग और जबरन बाल विवाह का भंडाफोड़.
> हत्या की साजिश के इनपुट पर झालावाड़ पुलिस का बड़ा एक्शन: पुलिस द्वारा स्वयं दर्ज करवाई गई एफआईआर
> ‘शादी’ के नाम पर नाबालिग की खरीद-फरोख्त: विवाह के नाम पर ₹4 लाख में बेची गई थी 17 साल की किशोरी, स्टाम्प पर अमानवीय शर्तों के साथ बनाया था बंधक
> बेटी का सौदा करने वाला पिता, बिचौलिया मामा और दोगुनी उम्र का खरीदार ‘कथित पति’ गिरफ्तार, विभिन्न धाराओं सहित बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई
रणवीर सिंह चौहान
स्मार्ट हलचल/ भवानी मंडी भवानी मंडी पुलिस ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग मामले का भंडाफोड़ करते हुए संभावित हत्या के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि पुलिस थाना भवानीमंडी द्वारा एक जटिल और संवेदनशील मामले में तत्परता से अनुसंधान करते हुए न केवल एक संभावित हत्या की साजिश को नाकाम किया गया, बल्कि उसके पीछे छिपे नाबालिग के क्रय-विक्रय, जबरन बाल विवाह और मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना के मामले को उजागर किया गया है। पुलिस ने इस मामले में तत्परता बरतते हुए पीड़िता का सौदा करने वाले पिता, बिचौलिए मामा तथा उसे खरीदने वाले कथित पति सहित तीनों प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता अर्जित की है।
*गोपनीय परिवाद और मामले की शुरुआत:-* दिनांक 14 अक्टूबर को कार्यालय पुलिस अधीक्षक झालावाड में एक गोपनीय परिवाद प्राप्त हुआ। एक युवक ने बताया कि लगभग एक से डेढ़ साल पहले कार्य के दौरान उसकी पहचान पूजा (परिवर्तित नाम) नामक युवती से हुई थी। उसने कुछ समय बाद ही वहां से काम छोड़ दिया। पूजा (परिवर्तित नाम) द्वारा युवक को अचानक सोशल मीडिया पर मैसेज किया कि तुम किसी को मरवा सकते हो क्या। आगे बात करने पर पूजा (परिवर्तित नाम) ने युवक को एक व्यक्ति का फोटो भेजकर हत्या करवाने की बात पूछी। फोटो से युवक को को शक हुआ कि यह तो पूजा का पति विजय (परिवर्तित नाम) है। हत्या के अपराध की आशंका होने पर युवक द्वारा झालावाड पुलिस के साथ गोपनीय रूप से डिजिटल साक्ष्यों व चैट स्क्रीनशॉट के साथ यह सम्पूर्ण शिकायत साझा की गयी। चूंकि युवक द्वारा शिकायत साझा कर एफआईआर दर्ज कराने में संकोच कर रहा था, तब मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस थाना भवानीमण्डी में पुलिस की ओर से आपराधिक षडयंत्र एवं हत्या के दुष्प्रेरण का मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया गया।
*पीड़िता की दस्तयाबी और सच का प्रकटीकरण:-* पुलिस अधीक्षक ने बताया कि त्वरित तकनीकी व धरातलीय आसूचना के आधार पर दिनांक 16.10.2026 को पूजा (परिवर्तित नाम) को दस्तयाब कर लिया। पूछताछ के प्रारंभ में ही स्पष्ट हो गया कि युवती अत्यंत गंभीर अवसाद और अमानवीय परिस्थितियों से जूझ रही थी। मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पीड़िता को तत्काल सखी वन स्टॉप सेंटर झालावाड़ में सुरक्षित दाखिल कराया गया। इसके पश्चात माननीय न्यायालय के समक्ष पीड़िता के विधिवत बयान करवाए गए।
*04 लाख में नाबालिग का सौदा:-* माननीय न्यायालय में दिए गए बयानों तथा परिजनों से गहनता से किए गए अनुसंधान में यह तथ्य उजागर हुआ कि यह प्रकरण सामान्य वैवाहिक विवाद या मात्र अपराध की योजना का नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक नाबालिग बालिका के
क्रय-विक्रय का अमानवीय अपराध था। दिनांक 15 अक्टूबर को जब पीड़िता की वास्तविक आयु मात्र 17 वर्ष 08 माह 20 दिन थी, तब उसके पिता रमेश (परिवर्तित नाम) तथा मामा दिनेश (परिवर्तित नाम) ने बालिका की इच्छा और सहमति के विरुद्ध जाकर उसका सौदा विजय (परिवर्तित नाम) जो बालिका से लगभग दोगुनी उम्र का था से तय कर दिया। शादी की आड़ में पिता व मामा ने आरोपी विजय (परिवर्तित नाम) से चार लाख रुपये नकद वसूल किए। इस सौदे को सार्वजनिक होने से बचाने व युवती के नाबालिग होने की स्थिति में किसी भी प्रकार के विवाह निमंत्रण कार्ड नहीं छपवाए गए और अत्यंत गुप्त तरीके से नाबालिग की शादी अपनी उम्र से लगभग दोगुनी उम्र के व्यक्ति के साथ करवा दी गई।
*घर से पलायन और स्टाम्प की अमानवीय शर्त:-* शादी के बाद से ही पीड़िता लगातार गंभीर शारीरिक और मानसिक शोषण झेल रही थी। अपनी इस नारकीय स्थिति से तंग आकर वह बाल विवाह के 20 दिन बाद ही घर से भाग निकली। पूजा (परिवर्तित नाम) इस शादी से निकलकर अपने प्रेमी से शादी करना चाहती थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद पीड़िता को दस्तयाब कर लिया गया जहां से उसने परिजनों के साथ जाने से इनकार कर दिया जिसके बाद पीड़िता के बालिग होने तक वह बालिका गृह कोटा में रही। पूजा (परिवर्तित नाम) इस बैमेल शादी से निकलना चाहती थी इसी बीच उसके प्रेमी की शादी हो जाने पर व बालिका के बालिग हो जाने पर उसे पुनः परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। पूजा (परिवर्तित नाम) अपने परिजाजनों से लगातार मिन्नतें करती रही कि मुझे इस शादी में नहीं रहना तो इसके परिजन बोलते थे कि हमने तो तेरा सौदा कर दिया है।
असहाय अवस्था में जब वह पुनः पारिवारिक मध्यस्थता के दायरे में आई, तो परिजनों ने उसकी सुरक्षा और संवेदना को दरकिनार करते हुए उसे पुनः उसी खरीदार पुरुष विजय (परिवर्तित नाम) के हवाले कर दिया। पूजा (परिवर्तित नाम) को अपने कथित पति की ओर से लगातार धमकियाँ मिलती थी कि अगर मुझे छोड़कर गयी तो तेरे परिवार को मुकदमों में फंसा दूँगा। इसके बाद भी युवती इस वर्ष अगस्त माह से पूर्व भी दोबारा इस शादी से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी इसके बावजूद परिवारजनों ने बकायदा नोटरी के समक्ष एक स्टाम्प पर राजीनामा तैयार करवाया गया। इस स्टाम्प में यह स्पष्ट और अमानवीय शर्त दर्ज की गई कि *”यदि यह लड़की बिना बताए दोबारा कहीं जाती है या भागती है, तो उसके पिता को चार लाख रुपये देने होंगे।”* साथ ही उसके आने-जाने, फोन रखने और सामान्य मानवीय स्वतंत्रता पर पाबंदियां लगाई गई। इस दस्तावेज ने यह प्रमाणित कर दिया कि पीड़िता को एक स्वतंत्र इंसान के बजाय एक बंधक और बिकाऊ वस्तु की तरह रखा गया था, जिसके दबाव और घुटन के चलते उसने अवसाद में आकर आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास किया।
*मुकदमे में मानव तस्करी व बाल विवाह की गंभीर धाराओं का इजाफा:* चूंकि घटना के समय पीड़िता पूर्ण रूप से नाबालिग थी और पैसों के लेनदेन के आधार पर उसका जबरन विवाह करवाकर उसे प्रताड़ित किया गया था, अतः प्रकरण में नाबालिग की तस्करी व शोषण, विवाह के उद्देश्य से अपहरण या मजबूर करना तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम धारायें जोड़कर आगामी अनुसंधान किया जा रहा है।
*गिरफ्तारशुदा आरोपी:-*
01. विजय (परिवर्तित नाम) उम्र 34 वर्ष – कथित पति/खरीदार (जिसने 04 लाख रुपये देकर नाबालिग को खरीदा और प्रताड़ित किया)।
02. रमेश (परिवर्तित नाम) उम्र 46 वर्ष – पीड़िता का पिता/विक्रेता (जिसने अपनी ही नाबालिग पुत्री का 04 लाख में सौदा किया)।
03. दिनेश (परिवर्तित नाम) उम्र 50 वर्ष – पीड़िता का मामा (जिसने सौदेबाजी में मध्यस्थ व दलाल की भूमिका निभाई)।
*अपील:* झालावाड़ पुलिस की आमजन से विनम्र अपील है कि यदि समाज में कहीं भी विवाह के नाम पर युवतियों की खरीद-फरोख्त या बाल विवाह की सूचना मिले, तो तत्काल नजदीकी पुलिस थाने अथवा हेल्पलाइन पर सूचित करें। सूचना देने वाले का नाम व पहचान पूर्णतः गुप्त रखी जाएगी
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