जहाजपुर क्षेत्र में फसलों का सघन सर्वे, कीट प्रकोप फिलहाल आर्थिक नुकसान स्तर से नीचे
कपास में थ्रिप्स-सफेद मक्खी, मक्का में फॉल आर्मी वॉर्म व उड़द में येलो मोजेक के मिले लक्षण; किसानों को सतर्क रहने की सलाह
अलकेश पारीक
जहाजपुर। स्मार्ट हलचल।कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के टिड्डी एवं एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र जयपुर तथा कृषि विभाग भीलवाड़ा के संयुक्त तकनीकी दल ने गुरुवार को जहाजपुर क्षेत्र में कपास, मक्का, उड़द एवं ज्वार की फसलों का सघन सर्वेक्षण किया। राहत की बात यह रही कि फिलहाल फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप आर्थिक नुकसान स्तर (ETL) से नीचे पाया गया।
तकनीकी दल ने जहाजपुर, जलमपुरा, बिहाड़ा, जीरा, हाथोड़िया, खजुरिया खेड़ा और पंडेर क्षेत्र में खेतों का निरीक्षण कर फसलों की स्थिति का जायजा लिया। सर्वेक्षण दल में सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी श्योराम एवं डॉ. जगदीश यादव, कृषि विभाग जहाजपुर के सहायक कृषि अधिकारी सीताराम मीणा, कृषि पर्यवेक्षक दिनेश मीणा तथा दुर्गालाल मीणा शामिल रहे।
निरीक्षण के दौरान कपास की फसल में थ्रिप्स, सफेद मक्खी एवं जैसिड (हॉपर), मक्का में फॉल आर्मी वॉर्म तथा उड़द में येलो मोजेक रोग के लक्षण देखने को मिले। अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में इनका प्रकोप आर्थिक नुकसान स्तर से नीचे है। ऐसे में किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन फसलों की नियमित निगरानी जरूरी है।
अनुशंसित कीटनाशक ही इस्तेमाल करने की सलाह
अधिकारियों ने किसानों से कहा कि कीटों का प्रकोप बढ़ने की स्थिति में अपनी मर्जी से अंधाधुंध कीटनाशकों का छिड़काव न करें। केवल सीआईबी एंड आरसी (CIB&RC) द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों का ही निर्धारित मात्रा में उपयोग करें।
सर्वेक्षण के दौरान किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें किसानों को कीटनाशकों के सुरक्षित, संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही कपास के कुछ खेतों में गुलाबी सुंडी की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप तथा अन्य कीटों की रोकथाम के लिए नीले चिपचिपे ट्रैप लगाए गए।
तकनीकी दल ने किसानों को इन ट्रैप की उपयोगिता के साथ समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) की जानकारी देते हुए बताया कि समय पर निगरानी और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर कम कीटनाशक उपयोग में भी फसलों को कीटों से सुरक्षित रखा जा सकता है।
