महीनों बाद भी नहीं मिला जवाब: बजरी से भरे ट्रैक्टर पर थानाधिकारी की तस्वीर, जांच के बाद ‘कार्रवाई’ कहां?

महीनों बाद भी नहीं मिला जवाब: बजरी से भरे ट्रैक्टर पर थानाधिकारी की तस्वीर, जांच के बाद ‘कार्रवाई’ कहां?

शकरगढ़ में पुरानी तस्वीर ने फिर उठाए सवाल, थानाधिकारी के साथ अब उच्च अधिकारियों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में

अलकेश पारीक

शकरगढ़, स्मार्ट हलचल। शकरगढ़ थाना अधिकारी पूरणमल मीणा की एक महीनों पुरानी तस्वीर अब फिर चर्चा का विषय बन गई है। तस्वीर में थानाधिकारी एक ऐसे ट्रैक्टर पर बैठे दिखाई दे रहे हैं, जिसमें बजरी भरी हुई नजर आ रही है। तस्वीर सामने आने के बाद उस समय भी मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह के सवाल उठे थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों की ओर से जांच कराए जाने की बात भी सामने आई थी। लेकिन महीनों गुजरने के बाद आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि जांच में क्या सामने आया और जांच के आधार पर क्या कार्रवाई की गई।

यही चुप्पी अब थाना अधिकारी के साथ-साथ उच्च अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रही है। यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसकी रिपोर्ट और निष्कर्ष सामने क्यों नहीं आए? यदि जांच में कोई तथ्य सामने नहीं आया तो इसकी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई? और यदि कोई अनियमितता पाई गई तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

क्षेत्रवासियों का कहना है कि पुलिस महकमे से जुड़े किसी भी मामले में जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका निष्पक्ष परिणाम भी दिखाई देना चाहिए। लंबे समय से जांच के परिणाम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

सबसे बड़ा सवाल—जांच हुई तो नतीजा क्या निकला?

कार्रवाई हुई तो सामने क्यों नहीं आई? और अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आखिर वजह क्या है?

महीनों पुरानी तस्वीर आज भी सवाल पूछ रही है और अब नजरें सिर्फ शकरगढ़ थाना अधिकारी पर नहीं, बल्कि उस मामले की जांच करने वाले उच्च अधिकारियों की कार्यशैली और पारदर्शिता पर भी टिकी हैं।