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जहाजपुर:नियमों को जेब में रख धड़ल्ले से चलती खदानें, मूकदर्शक खान विभाग

 आज़ाद नेब 

जहाजपुर:नियमों को जेब में रख धड़ल्ले से चलती खदानें, मूकदर्शक खान विभाग

क्षेत्र में कई खदाने संचालित है, जो नियमों को जेब में रखकर धड़ल्ले से चल रही है। हर माइंस मालिक के पास या तो पैसे का पावर है या नेताओं के नाम की धौंस, यह सब दिखाकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। बेबस लाचार खान विभाग मूकदर्शक बनकर यह सब देख रही है।

आपको बताते चलें कि क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक खदाने संचालित है। जो बिना नियम कायदों के चल रही है। यहां पर खदानों के मालिक एक से बढ़कर एक हैं कोई ब्लास्टिंग के समय आम रास्ते को रोकता है तो दूसरा पर्यावरण को धता बताकर अपनी मनमानी करता नजर आता है। कई खदानें तो ऐसी है जहां पर उनकी लीज है वहां नहीं चल कर दूसरी जगह पर चल रही है। इन मनमानियों पर लगाम लगाने में खान विभाग अब तक नाकाम रहा है।

खदान पर्यावरण के नियमों को अनदेखा कर संचालित किया जा रहा है। ज्यादा मुनाफे के चक्कर में खदान मालिक ताबड़तोड़ ब्लास्टिंग कर रहे हैं, खदान सुरक्षा महानिदेशालय के नियमों के मुताबिक हैवी ब्लास्टिंग खदानों में प्रतिबंधित है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के चलते खदान मालिकों की मनमानी धड़ल्ले से चल रही है।

पक्के रोड़ पर खदान की डस्ट उड़ कर आती है वाहनों के चलने के कारण घरों में इतनी धूल आती है कि लोगों को अस्थमा की शिकायत आ रही है। धूल से बचाव के लिए खदान वालों को पानी का फव्वारा चलाने का नियम है। लेकिन ऐसा कोई उपाय नहीं किया जाता।

राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियमावली 1986 की धारा 30 में यह प्रावधान किया गया है कि टेक्नीकल एक्सपर्ट की मदद से ही खनन या ब्लास्ट करने का कार्य किया जाएगा। एक हेक्टेयर तक की माइंस के लिए सभी को सर्टिफाइड ब्लास्टर, माइंस मेट और जेई रखने अनिवार्य हैं। जबकि माइनिंग इंजीनियर एक हेक्टेयर तक की 15 खानों की मानिटरिंग कर सकता है या फिर जहां पर 150 सौ से अधिक मजदूर कार्य कर रहे हैं। उन माइंस में एक माइनिंग इंजीनियर रखा जाना अनिवार्य है। जिस माइंस में 20 मजदूर कार्य कर रहे हैं, वहां पर माइंस मेट रखा जाए, लेकिन ऐसे प्रावधान का राज्य में कोई मायने नहीं रह गया है। छोटे और मझौले श्रेणी के ज्यादातर माइंस में इस प्रावधान का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। एक दर्जन से भी अधिक माइंस है, जहां पर एक भी टेक्नीकल एक्सपर्ट नहीं है। टेक्नीकल एक्सपर्ट होने के कारण खानों में हादसे के होने की संभावनाएं कम होती है, लेकिन राज्य की हजारों की संख्या में माइंस केवल ऊपर वाले के भरोसे चल रही हैं। इसकी सुध लेने के लिए सरकार से लेकर खान विभाग तक के अफसर तैयार नहीं है।

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