जयपुर न्यायालय का फैसला: चैक बाउंस मामले में अभियुक्त दोषमुक्त

जयपुर: जयपुर महानगर द्वितीय के विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एन.आई. एक्ट प्रकरण) क्रम संख्या-8 की अदालत ने चैक बाउंस मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। मामला भीष्म कुमार बनाम प्रवीण कुमार श्रीवास्तव का था, जिसमें परिवादी ने आरोप लगाया था कि अभियुक्त ने निजी आवश्यकता हेतु ₹1,50,000 उधार लिए और उसके बदले 23 जुलाई 2010 को भारतीय स्टेट बैंक का चैक दिया।

यह चैक 31 दिसंबर 2010 को बैंक द्वारा “इनसफीसियेण्ट फण्ड्स” टिप्पणी के साथ अनादरित कर लौटा दिया गया। इसके बाद परिवादी ने 12 जनवरी 2011 को विधिक नोटिस भेजा, जिसकी प्राप्ति के बावजूद अभियुक्त ने राशि का भुगतान नहीं किया।

अभियुक्त का पक्ष

अभियुक्त ने आरोपों को अस्वीकार करते हुए कहा कि उसने कोई राशि उधार नहीं ली थी। उसका दावा था कि परिवादी ओएसिस और एयरटेल कंपनी का डी.एस.ए. संचालित करता था, जिससे उसने 10 पोस्टपेड सिम लिए थे और सुरक्षा के तौर पर खाली चैक व स्टाम्प दिए थे, जिनका दुरुपयोग किया गया।

न्यायालय का निर्णय

न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए पाया कि परिवादी यह साबित करने में असफल रहा कि चैक वैध ऋण या दायित्व की अदायगी हेतु दिया गया था। प्रस्तुत दस्तावेजों में आवश्यक प्रमाणिकता का अभाव था।

परिणामस्वरूप, अदालत ने अभियुक्त प्रवीण कुमार श्रीवास्तव को दोषमुक्त कर दिया।