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जयपुर:सांगनेर की अवैध कॉलोनियो की खाली जमीन को कब्जे में नहीं लेने पर अवमानना नोटिस

(महेन्द्र नागौरी)

जयपुर/ भीलवाडा|स्मार्ट हलचल|पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था के अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी, अभिनव भंडारी और डॉ टी एन शर्मा ने सांगानेर की 87 कॉलोनी में खाली पड़े हुए भूखंडों का सरकार द्वारा कब्जा नहीं लेने और प्रभावशाली लोगों के बड़े-बड़े प्लाटों से अतिक्रमण नहीं हटाने के मामले में राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव सुधांशु पंत, शहरी विकास सचिव देवाशीष पुष्टि, जयपुर विकास प्राधिकरण के सचिव निशांत जैन व आवासन मंडल आयुक्त डॉ रश्मि को विधिक नोटिस भेज कर मांग की है कि 7 दिन के अंदर अंदर समस्त खाली भूखंडों पर कब्जा करें व भूमाफियाओं के द्वारा किए गए निर्माणों को ध्वस्त करें अन्यथा उनके विरुद्ध राजस्थान उच्च न्यायालय में अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रभावशाली लोगों ने और भूमाफियाओं ने राजस्थान सरकार से मिली भगत करके अवैध कब्जों को वैद्य घोषित करवाने के लिए 12 मार्च 2025 को एक आदेश जारी करवाया कि सांगानेर की उन सभी कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा जिन जमीनों को हाउसिंग बोर्ड ने अवाप्त कर ली थी और उसके बाद अतिक्रमियों ने उन जमीनों पर अवैध कब्जा कर लिया था। इस आदेश को पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था ने राजस्थान उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर निवेदन किया था कि सरकारी जमीन पर भूमाफियाओं और बड़े अधिकारियों ने मिली भगत करके सोसाइटी से फर्जी पट्टे प्राप्त कर लिए हैं और सरकार से मिलीभगत करके उनको नियमित किया जा रहा है जिस पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिए थे कि 87 कालोनियां जो बी-2 बाईपास से सांगानेर के अंदर आती है इन सभी जमीनों को हाउसिंग बोर्ड ने काश्तकारो से ख़रीदा था और उसके बाद काश्तकारो को उनका भुगतान भी कर दिया था मगर अधिकारियों ने भूमाफियाओं के साथ मिलीभगत कर उन सभी जमीनों पर कब्जे करवा दिया और अब मिलीभगत करके ही उनका नियमन करवा रहे है उन सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जाए और उन जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा प्रकरण को 8 सप्ताह बाद सुनवाई हेतु नियत किया गया था उसके पश्चात प्रभावशाली लोगों ने और भूमाफियाओं ने सरकार से मिली भगत करके हाई कोर्ट के 20 अगस्त 2025 के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को फटकार लगाई और एसएलपी को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी 17 दिसंबर 2024 के आदेश के द्वारा समस्त राज्य सरकारों को निर्देश दिए थे की अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई करें। राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ के न्यायाधीश एस पी शर्मा न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस नियमन के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की थी कि सरकारी जमीनों के कब्जों को कैसे नियमित किया जा सकता है तथा जवाब प्रस्तुत होने के पश्चात उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी जिनकी उपस्थिति में ये अवैध निर्माण हुए हैं भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को उन सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश दिए जाएंगे।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश की सात दिवस में उचित पालना नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी।

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