एजाज़ अहमद उस्मानी
स्मार्ट हलचल|अक्सर माना जाता है कि विकास की जिम्मेदारी केवल सरकार की होती है, लेकिन सांभरलेक क्षेत्र के एक छोटे से गांव ने इस सोच को बदल दिया है। ग्राम पंचायत बरडोती के अंतर्गत आने वाले झपोक गांव के मुस्लिम मोहल्ले ने प्रशासनिक उदासीनता के बावजूद एकजुटता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन सकती है।
मोहल्ले में लंबे समय से सीवरेज निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं थी। गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता था, जिससे आवागमन बाधित होता और संक्रमण का खतरा बना रहता। कई बार शिकायतों के बावजूद जब समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीणों ने खुद पहल करने का निर्णय लिया।
करीब 30–40 घरों के लोगों ने आपसी सहयोग से धन एकत्र किया और लगभग आधा किलोमीटर लंबी सीवरेज पाइपलाइन बिछा दी। इस प्रयास के बाद गंदे पानी की निकासी सुचारु रूप से होने लगी है। सड़कों पर जलभराव समाप्त हो गया है और मोहल्ले में साफ-सफाई व सुगम आवागमन सुनिश्चित हुआ है।
*खुद संभाली सफाई रन व्यवस्था*
ग्रामीणों ने केवल सीवरेज समस्या ही नहीं सुलझाई, बल्कि नियमित सफाई के लिए भी स्थायी व्यवस्था की। सभी परिवार मिलकर एक सफाई कर्मचारी का वेतन वहन करते हैं, जिससे क्षेत्र में स्वच्छता बनी रहती है और बीमारियों की आशंका कम हुई है।
*हर सामूहिक काम में एकजुटता*
झपोक का यह मोहल्ला सामूहिक भागीदारी के लिए जाना जाता है। चाहे बिजली के पोल लगवाने हों या अन्य बुनियादी सुविधाएं, सभी लोग मिलकर जिम्मेदारी निभाते हैं। यही कारण है कि क्षेत्र में अनुशासन और सुव्यवस्थित बसावट साफ दिखाई देती है।
*सामाजिक सौहार्द की मिसाल*
मोहल्ले में सामाजिक सौहार्द भी मजबूत है। ईद, विवाह समारोह या अन्य आयोजनों में हिंदू समुदाय के लोगों को भी आमंत्रित किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि आपसी भाईचारे और सहयोग की भावना के कारण यहां शांति और समरसता कायम है।
झपोक के निवासियों की यह पहल दर्शाती है कि यदि समाज ठान ले, तो विकास के लिए प्रशासनिक इंतजार जरूरी नहीं। सामूहिक इच्छाशक्ति और सहयोग से समस्याओं का समाधान अपने स्तर पर भी संभव है। आज यह प्रयास पूरे इलाके में प्रेरणादायक चर्चा का विषय बना हुआ है।
