पुनित चपलोत
भीलवाड़ा। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महात्मा गांधी चिकित्सालय की मातृ एवं शिशु इकाई में गर्भवती महिला की मौत के बाद शुक्रवार को परिजनों और ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मोर्चरी के बाहर प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
जानकारी के अनुसार कोटड़ी थाना क्षेत्र के रीठ गांव निवासी रामू देवी भील को प्रसव के लिए महात्मा गांधी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। मृतका के पति बालूलाल भील ने आरोप लगाया कि अस्पताल स्टाफ ने इलाज और देखभाल के नाम पर 5 से 6 हजार रुपए की मांग की। उन्होंने बताया कि 6 मई को खून की कमी होने पर उनकी पत्नी को कोटड़ी अस्पताल से भीलवाड़ा रेफर किया गया था। यहां डॉक्टरों द्वारा लगातार ब्लड की बोतलें मंगवाई गईं, जिनकी व्यवस्था परिजनों ने आर्थिक तंगी के बावजूद की।
बालूलाल का आरोप है कि गुरुवार शाम पत्नी के पेट में तेज दर्द शुरू होने पर उन्होंने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को कई बार सूचना दी, लेकिन काफी देर तक कोई उपचार नहीं किया गया। समय पर इलाज नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई।
वहीं ग्रामीण उदयसिंह चारण ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल में गरीब मरीजों की अनदेखी की जाती है और उन्हें निजी क्लीनिकों व जांच केंद्रों की ओर भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि बिना पैसे कोई काम नहीं किया जाता। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला की मौत के बाद परिजनों की सहमति के बिना शव को मोर्चरी में रख दिया गया।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने दोषी डॉक्टरों और नर्सिंगकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की।
