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Home भीलवाड़ा जिले में बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए आवष्यक तैयारियां

जिले में बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए आवष्यक तैयारियां

जिले में बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए आवष्यक तैयारियां
भीलवाड़ा 07 जनवरी जिला कलक्टर श्री षिवप्रसाद एम. नकाते की अध्यक्षता में जिले में  आषंकित बर्ड फ्लू की रोकथाम को लेकर बैठक आयोजित की गई। श्री नकाते ने अधिकारियों को बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए आवष्यक दिषा निर्देष दिये और सैम्पल जांच बढ़ाने को कहा। उन्होंने कहा कि इसके प्रति गंभीर होकर आवष्यक तैयारियां करे।  बैठक में संयुक्त निदेषक पषुपालन डाॅ. प्रमोद पंचोली, डिप्टी सीएमएचओ डाॅ. घनष्याम चावला, उपवन संरक्षक श्री डीपी जागावात, सीनियर वेटनरी आॅफिसर डाॅ. आफताफ खान, पषुधन सहायक श्री मनोज शर्मा, नगर परिषद डीपीओ श्री अमृतलाल खोईवाल उपस्थित रहें।
संयुक्त निदेषक पषुपालन डाॅ. प्रमोद पंचोली ने बताया कि जिले में फिलहाल बर्ड फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है। पिछले कुछ दिनों में हुई पक्षियों की मौत का कारण उन्होंने प्राकृतिक बताया। उन्होंने बताया कि जिले के 53 पोल्ट्री फाॅर्म पर एहतिहातन तौर पर 50 अधिकारियों से भी ज्यादा की टीम पोल्ट्री फाॅर्म पर लोगो को मार्गदर्षित करने, और आवष्यक जानकारिया देने के लिए लगाई गई है। श्री जागावत ने बताया कि बर्ड फ्लू निगरानी के लिए जिले में रेंज आॅफिसर्स को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। नगर परिषद के अधिकारी को ऐसी जगह जहां पक्षियों को दाना डाला जाता है वहां साफ-सफाई का विषेष तौर पर ध्यान रखने को कहा गया। बर्ड फ्लू को लेकर जानकारी और सूचना के लिए जिला कंट्रोल रूम 01482-232680पर सम्पर्क किया जा सकता है। संबंधित जानकारी के लिए पषुपालन विभाग के संयुक्त निदेषक मोबाईल नं. 9414615750 या उपवन संरक्षक डाॅ. डीपी जागावत 7568580058 से भी सम्पर्क कर सकते है।
यह है लक्षण व बचाव के उपायः
पिछले कुछ दिनों में प्रदेष के बीकानेर, बांरा, झालावाड़, पाली, आदि जिलो से बर्ड फ्लू से कौओं, बतख आदि पक्षियों के मरने की खबरे आ रही हैं। बर्ड फ्लू एक गंभीर संक्रामक बीमारी है और इसको फैलने से रोकना ही सबसे बड़ा निदान है। बर्ड फ्लू (एवियन इनफ्लूएन्जा) आॅर्थोमिक्सोंविरिडी परिवार के इन्फ्लूएन्जा वायरस से फैलता है। इस रोग का वायरस रोगी पक्षी की लार, नाक के स्त्राव व बींट में पाया जाता है। रोगी पक्षियों, संक्रमित आहार, पानी व उपकरणों के सम्पर्क में आने से स्वस्थ पक्षियों में फैलता है। इसका संक्रमण मनुष्यों में भी हो सकता है। पक्षियों का सुस्त होकर खाना पीना बन्द करना, अण्डा उत्पादन में अत्यधिक कमी, पक्षी के तीव्र जुकाम व नासाछिद्र व आँखो से स्राव होना, पक्षी के सिर व गर्दन पर सूजन आना, कलंगी व लटकन पर सूजन एवं नीलापन आना, अचानक अधिक संख्या में पक्षियों की मृत्यु होना इस रोग के लक्षण है।

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