Homeभीलवाड़ाकच्चे सूत के धागे की मेल पहनने का विशेष महत्त्व

कच्चे सूत के धागे की मेल पहनने का विशेष महत्त्व

रोहित सोनी

आसींद । दशामाता की मेल से सुख- सौभाग्य,शांति -समृद्धि की कामना पूर्ण होती है। उपखण्ड क्षेत्र आसींद के दड़ावट ग्राम पंचायत के चोटियास गांव में दशा माता की मेल बनाने का काम पिछली कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। यह मेल(पीला कच्चा धागा )कच्चे सूत धागे से बनाकर हल्दी से रंग करके पहनते है।वर्तमान में गांव चोटियास के ग्राम व्यास पंडित भँवरलाल शर्मा पिछले पचास वर्षों से मेल बनाते आ रहें है।इन्होने बताया कि होलिका दहन के दिन इन मेल को होली को दर्शन करवाकर दश दिन पूजा करके सभी महिलाओं को दिया जाता है।पहले मेरे पिताजी नारायण लाल शर्मा बनाते थे। आचार्य गोपाल शास्त्री ने मेल का महत्व बताते हुए कहा कि यह मेल सूत के कच्चे धागे से बनाई जाती है। इसे पूरा गुंथ कर दश गांठ लगाई जाती है। दश गांठ दश देवी के प्रतीक रूप में होती है।होली के दूसरे से ही दशा माता की स्थापना करके कुमकुम, मेहंदी, काजल से पूजन करके माता रानी की कहानियाँ सुनी जाती है। रोजाना दस दिनो तक व्रत रखा जाता है। अंतिम दिन दशमी को पीपल का पूजन करके महिलाएं सुख समृद्धि, दाम्पत्य व स्वस्थ जीवन की कामना की जाती है। इस पूजन से रोग, दोष, पीड़ा, बीमारी का प्रकोप नहीं रहता है।मध्य में शीतला सप्तमी और अष्टमी को शीतला माता का बासोड़ा पूजन भी किया जाता है।पूजन, व्रत, उपवास करने से इन दस दिनों में माता रानी की कृपा बनी रहती है।

स्मार्ट हलचल न्यूज़ पेपर 31 जनवरी 2025, Smart Halchal News Paper 31 January 2025
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