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कलयुगी पुत्र और पुत्रवधू ने मां और बाप पर ढहाए सितम, एसपी से लगाई न्याय की गुहार

भीलवाडा l योगेश लिमानी

बुढ़ापे की लाठी कहलाने वाले बेटे से बड़े होने पर कई उम्मीद मां-बाप रखते है। वह उनके भविष्य का सहारा होता है। जिंदगी के आखिरी पड़ाव में लाठी का सहारा बनने का सपना देखा जाता है। लेकिन इससे विपरीत जाकर कलयुगी बेटे और बहू ने अपने ही माता-पिता पर जुल्म किए। बल्कि उनको अपने ही घर से बेदखल करके खेत पर रहने को मजबूर कर दिया। आंसूओं का सैलाब दिल में लेकर आए बुजुर्ग दम्पती ने पुलिस अधीक्षक से न्यास की गुहार लगाई है। वह अपने ऐसे बेटे को बेदखल करना चाहते है। यह व्यथा है माण्डलगढ़ तहसील के बीगोद कस्बे के रहने वाले अब्दुल रसीद फकीर व उनकी पत्नी रईसा बानो की। उनके तीन पुत्र और एक पुत्री है। सबसे छोटे बेटा उस्मान फ कीर व उसकी पत्नी जैनब अपने ही माता-पिता के साथ मारपीट करते है। हालात यह कि उन पर लाते-घूसे तक चलाते है। बुजुर्ग दम्पती इस जुल्म के खिलाफ संघर्ष नहीं कर पाते। बेटे और बहू ने बुजुर्ग दम्पती को घर से निकाल कर बेदखल कर दिया। कड़ाके की सर्द रात में दम्पती खेत पर रहने को मजबूर है। जबकि उनकी खुद का गांव में मकान है। बेटे-बहू इस मकान और अन्य जायदाद को हड़पने के लिए मारपीट करते है। बेटे-बहू के गलत संगत में पडऩे के कारण वह इस तरह की हरकत कर रहे है। यहीं नहीं पुत्र ने अपने ही पिता और मां के खिलाफ थाने व न्यायालय में झूठा मुकदमा तक दर्ज करवा दिया। इससे माता-पिता की छवि धूमिल हुई। बुजुर्ग दम्पती अपनी जायदाद से बेदखल करने के लिए अदालत का सहारा भी ले रहे है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा से भी मिलकर अपनी पीड़ा बयां की। उन्होंने जब अपनी बात रखी तो पिता के आंखों से आंसूओं का सैलाब निकल गया। यहीं सैलाब इन्हां की कहानी बयां कर रहा था। पिता का कहना है कि वह परेशान हो गए है। बुजुर्ग होने से अब वह कहां जाए। बेटा घर में घुसने नहीं देता। दाने-दाने को मोहताज हो रहे है।

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