अनपढ़ माता-पिता की मेहनत रंग लाई, 300 रुपये मजदूरी करने वाले परिवार का बेटा बना जिले की प्रेरणा…
कर्ज लेकर पढ़ाया बेटा, 96.20% अंकों से चमका भविष्य,4 अप्रैल को IIT की परीक्षा,सफल हुआ तो ठीक नहीं तो IAS बनेगा गौरव…
गरीबी हार गई, हौसला जीत गया,मजदूर माता-पिता के त्याग ने बेटे को दिलाई बड़ी सफलता…
खामोर@(किशन वैष्णव)संघर्ष जब संकल्प बन जाए और मेहनत जब लक्ष्य से जुड़ जाए, तब सफलता इतिहास रचती है। खामोर गांव के साधारण किसान परिवार से आने वाले होनहार छात्र गौरव बैरवा ने कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा में 96.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादों के आगे हार मान लेती हैं। प्रिंस सीनियर सेकेंडरी स्कूल, श्यामपुरा धोद, सीकर के छात्र गौरव बैरवा,किसान जेठू लाल बैरवा एवं माता सीमा देवी के पुत्र हैं। दोनों माता-पिता स्वयं अनपढ़ हैं, लेकिन उन्होंने शिक्षा को ही बेटे का भविष्य बनाने का सपना देखा। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने कभी पढ़ाई रुकने नहीं दी।
300 रुपये मजदूरी और कर्ज के सहारे चलती रही पढ़ाई
परिवार की आजीविका मजदूरी पर निर्भर है। माता-पिता दिन-रात मेहनत कर करीब 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी से घर और बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाते रहे। कई बार आर्थिक संकट इतना बढ़ा कि बेटे की पढ़ाई जारी रखने के लिए कर्ज तक लेना पड़ा, लेकिन माता-पिता का विश्वास नहीं टूटा। पिता जेठू लाल बैरवा ने भावुक होकर कहा हम भले पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन बेटे को पढ़ाकर सफल इंसान बनाना है। जरूरत पड़ी तो जमीन और घर भी बेच देंगे, पर पढ़ाई नहीं रुकने देंगे।” पिता के इसी अटूट विश्वास और माता के त्याग ने गौरव को लगातार मेहनत करने की प्रेरणा दी।
सफलता के बाद भी नहीं रुका जुनून
96.20 प्रतिशत अंक हासिल करने के बावजूद गौरव खुद को पूरी तरह संतुष्ट नहीं मानता। अंग्रेजी विषय में 90 अंक आने पर उसने कहा कि परीक्षा और बेहतर हुई थी, इसलिए वह उत्तर पुस्तिका की रिचेकिंग करवाएगा। उसका मानना है कि मेहनत का पूरा परिणाम मिलना चाहिए।
अब IIT या IAS बनने का बड़ा सपना
गौरव ने वर्तमान में आईआईटी प्रवेश परीक्षा के लिए फॉर्म भर रखा है। यदि IIT में चयन होता है तो वह इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा। वहीं यदि अपेक्षित सफलता नहीं मिलती है तो उसका लक्ष्य आईएएस बनकर देश सेवा करना है। गांव के साधारण परिवार से निकलकर बड़े सपने देखने वाला गौरव आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
परिवार और गांव में खुशी की लहर
गौरव की सफलता पर बड़े पिता घनश्याम बैरवा (अंबेडकर विचार मंच अध्यक्ष, खामोर) सहित परिवार के सदस्य राजकुमार बैरवा (बड़ा भाई), तारा बैरवा, किस्मत बैरवा (बहन) एवं राकेश (छोटा भाई) ने हर्ष व्यक्त करते हुए उसे बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। गांव में गौरव की उपलब्धि को लेकर गर्व और उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सफलता केवल एक छात्र की नहीं बल्कि माता-पिता के त्याग, मेहनत और शिक्षा के प्रति विश्वास की जीत है।
