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यूरिया की किल्लत ने तोड़ी किसानों की कमर,घने कोहरे में अलसुबह लाइन लगाकर भी बैरंग लौट रहे अन्नदाता

मुकेश खटीक
मंगरोप।क्षेत्र में यूरिया की भारी किल्लत से जूझ रहे किसान लगातार परेशानियों का सामना कर रहे हैं।हालात ऐसे हैं कि किसान बार-बार सहकारी समितियों के चक्कर काटने के बावजूद खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।हमीरगढ़ उपखंड क्षेत्र के खैराबाद गांव में मंगलवार को इसका जीवंत उदाहरण देखने को मिला,जब अल सुबह घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बीच किसान सहकारी समिति के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आए।इस मौसम में जहां आमजन अपने गर्म और आलीशान घरों में दुबके हुए हैं,वहीं किसान अपनी फसलों और साख को बचाने की मजबूरी में ठिठुरती ठंड के बीच घरों से निकलने को विवश हैं।किसानों का कहना है कि समय पर यूरिया नहीं मिलने से फसल प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है,जिससे आर्थिक नुकसान तय है।खैराबाद सहकारी समिति के बाहर केवल स्थानीय ही नहीं,बल्कि बिलिया कलां,नाथडियास,कान्याखेड़ी सहित आसपास के कई गांवों के किसान अल सुबह से ही जमा हो गए।ठंड से बचने के लिए किसान अलाव तापते हुए अपनी बारी का इंतजार करते रहे,लेकिन सीमित आपूर्ति के चलते अधिकांश किसानों को निराशा ही हाथ लगी।किसानों का आरोप है कि बार-बार समस्या उठाने के बावजूद उनकी आवाज सरकार और संबंधित विभागों तक नहीं पहुंच पा रही है।यूरिया की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं होने से किसानों में भारी रोष और मायूसी व्याप्त है।यदि जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी,तो आने वाले समय में फसलों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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