पहले विरोध, अब गौशाला के ट्रैक्टर से ही डंप हो रहा कचरा! जलते ढेर में भोजन तलाशता गौवंश, खजूरी में जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

पहले विरोध, अब गौशाला के ट्रैक्टर से ही डंप हो रहा कचरा! जलते ढेर में भोजन तलाशता गौवंश, खजूरी में जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

प्लास्टिक और जहरीले धुएं के बीच भूख मिटाने को मजबूर गायें; जिस जगह का गौशाला प्रबंधकों ने किया था कड़ा विरोध, अब वहीं ट्रैक्टर से कचरा पहुंचाने पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

खजूरी/जहाजपुर (स्मार्ट हलचल)

ग्राम पंचायत खजूरी में कचरा निस्तारण का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। गांव में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारों के दावों के बीच धरातल पर हालात बेहद चिंताजनक हैं। खुले में कचरे के अंबार लगे हैं, जगह-जगह कचरा सुलग रहा है और उससे उठते जहरीले धुएं के बीच बेजुबान गौवंश पेट भरने की जद्दोजहद में भटक रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस स्थान पर कचरा डालने का पूर्व में गौशाला से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध किया था, अब उसी स्थान पर गौशाला के ट्रैक्टर से ही कचरा एकत्रित कर डंप किया जा रहा है।

पहले विरोध, अब उसी व्यवस्था में ट्रैक्टर की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल गौशाला के ट्रैक्टर के उपयोग को लेकर खड़ा हो रहा है। पूर्व में जब इसी स्थान पर डंपिंग यार्ड बनाने की बात सामने आई थी, तब गौशाला से जुड़े लोगों ने गौवंश को होने वाले जानलेवा नुकसान का हवाला देकर भारी विरोध जताया था। लेकिन अब उसी ट्रैक्टर से कचरा लाकर यहां डाला जा रहा है। ग्रामीणों में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जिस व्यवस्था को पहले गलत बताया गया था, अब उसी में संलिप्तता क्यों दिखाई दे रही है? क्या नियम बदल गए या फिर विरोध केवल दिखावे तक सीमित था?

गौसेवा के दावों के बीच जमीन पर अलग तस्वीर

गौवंश संरक्षण और सेवा की बातें केवल भाषणों तक सीमित नजर आ रही हैं। मौके पर प्लास्टिक की थैलियां, पॉलीथिन, घरेलू कचरा और सड़ा-गला अपशिष्ट खुले में बिखरा पड़ा है। कई जगह कचरे के ढेरों में आग जलती नजर आ रही है। भूख से व्याकुल गायें इसी जलते कचरे और प्लास्टिक के बीच चारा तलाश रही हैं। पॉलीथिन निगलने से आए दिन गायों के अकाल मौत के मुंह में समाने का अंदेशा बना रहता है, वहीं कचरा जलने से उठ रहा धुआं वायु प्रदूषण फैला रहा है।

🛑 खजूरी कचरा निस्तारण व गौवंश संकट : मुख्य बिंदु

  • खुली लापरवाही: खुले मैदान में कचरे के अंबार, प्लास्टिक और गंदगी के बीच भोजन तलाशता बेजुबान गौवंश।
  • दोहरा मापदंड: जिस स्थल का पहले गौशाला प्रबंधकों ने विरोध किया, अब उसी स्थान पर गौशाला के ट्रैक्टर से कचरा परिवहन।
  • पर्यावरण को नुकसान: खुले में कचरा जलाए जाने से उठ रहा दमघोंटू धुआं, हवा हो रही जहरीली।
  • ग्रामीणों की मांग: ट्रैक्टर के उपयोग की जांच हो, खुले में कचरा डंप करने पर रोक लगे और गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

🛑 जिम्मेदारों से 5 सीधे सवाल:

  1. पहले जिस स्थान पर कचरा डालने का विरोध हुआ, अब उसी स्थान पर कचरा क्यों डंप किया जा रहा है?
  2. गौशाला के ट्रैक्टर से गांव का कचरा ढोने की अनुमति किसने और किस नियम के तहत दी?
  3. खुले में कचरा जलाने और प्रदूषण फैलाने वालों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी किसकी है?
  4. प्लास्टिक और जहरीला अपशिष्ट खाने से बीमार होने वाले गौवंश की जिम्मेदारी कौन लेगा?
  5. क्या ग्राम पंचायत व उपखंड प्रशासन मौके का निरीक्षण कर जवाबदेही तय करेगा?

गौमाता की सेवा केवल भाषणों और दावों से नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए जमीन पर किए गए कार्यों से साबित होती है।