चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने महात्मा गांधी चिकित्सालय, भीलवाड़ा का किया सघन निरीक्षण, प्रसूता मृत्यु प्रकरण की उच्च स्तरीय समीक्षा, राज्य स्तरीय जांच समिति करेगी विस्तृत जांच

प्रत्येक मामले की होगी निष्पक्ष जांच, दोषी पाए जाने पर होगी सख्त कार्रवाई

15 जुलाई से प्रदेशभर में गर्भवती महिलाओं की सघन स्क्रीनिंग के लिए 5 दिवसीय विशेष अभियान

भीलवाड़ा, 14 जुलाई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने भीलवाड़ा स्थित महात्मा गांधी चिकित्सालय का सघन निरीक्षण कर हाल ही में हुई प्रसूता मृत्यु की घटनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने मेडिकल आईसीयू, गायनिक ऑपरेशन थिएटर तथा अन्य संबंधित वार्डों का निरीक्षण कर चिकित्सकीय व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा दिवंगत प्रसूताओं के नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रदेशभर में 15 जुलाई से 5 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत सभी गर्भवती महिलाओं की निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार सघन स्क्रीनिंग की जाएगी। साथ ही, प्रसव पूर्व आवश्यक जांचों (एएनसी) का रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से संधारित किया जाएगा तथा प्रत्येक गर्भवती महिला के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। अभियान के माध्यम से उच्च जोखिम (हाई-रिस्क) वाली गर्भवतियों की समय रहते पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा एवं आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में और अधिक कमी लाने के प्रयासों को गति मिलेगी।अभियान के लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए है ।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक गर्भवती महिला को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना है। इसके लिए विभागीय स्तर पर निरंतर निगरानी, चिकित्सकीय प्रोटोकॉल की कड़ाई से पालना तथा जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।

इसके उपरांत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें शाहपुरा विधायक श्री लालाराम बैरवा, पूर्व विधायक श्री विट्ठल शंकर अवस्थी, भीलवाड़ा जिला कलेक्टर श्री जसमीत सिंह संधू, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री प्रशांत मेवाड़ा, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं प्राचार्य एवं नियंत्रक, मेडिकल कॉलेज जोधपुर डॉ. बी .एस. जोधा, वरिष्ठ आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज कोटा डॉ. निर्मला शर्मा, निदेशक एएसएच डॉ. मधु, परियोजना निदेशक (मातृ स्वास्थ्य) डॉ. तरुण चौधरी, प्राचार्य एवं नियंत्रक, आरवीआरएस मेडिकल कॉलेज, भीलवाड़ा, चिकित्सा अधीक्षक, महात्मा गांधी चिकित्सालय, भीलवाड़ा तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), भीलवाड़ा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।। बैठक में प्रत्येक प्रकरण की गहन समीक्षा की गई तथा सभी चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक मातृ मृत्यु को अत्यंत गंभीरता से लेती है। पूरे प्रकरण की जांच राज्य स्तरीय समिति द्वारा की जा रही है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसे सार्वजनिक किया जाएगा तथा यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

श्री खीवसर ने कहा कि अस्पताल के पीएमओ ने जानकारी दी कि अस्पताल में चार प्रसूताओं की मृत्यु हुई थी ।चिकित्सालय प्रशासन द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार समाचारों में उल्लिखित पाँच महिलाओं में से एक महिला प्रसूता नहीं थी। वह बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए भर्ती हुई थीं तथा उनकी मृत्यु हृदयाघात के कारण हुई। एक अन्य महिला का चिकित्सालय में किसी प्रकार का ऑपरेशन नहीं किया गया था। उन्हें गंभीर अवस्था में रेफर किया गया था, जहां उपचार के दौरान हाइपोवोलेमिक शॉक के कारण उनका निधन हुआ। शेष तीन प्रसूताओं की मृत्यु क्रमशः पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म, HELLP सिंड्रोम तथा प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव (PPH) एवं डीआईसी (DIC) जैसी गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई।

चिकित्सालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि संबंधित सभी सिजेरियन ऑपरेशन ऑपरेशन थिएटर क्रमांक-1 में किए गए थे, जहां किसी भी प्रकार के संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई। ऑपरेशन थिएटर क्रमांक-2 को 30 जून 2026 से माइक्रोबायोलॉजिकल कल्चर पॉजिटिव आने के कारण बंद रखा गया था तथा उसमें कोई ऑपरेशन नहीं किया गया। वर्तमान में चिकित्सालय में 22 स्टरलाइज्ड ऑपरेशन सेट उपलब्ध हैं तथा आवश्यकता अनुसार उनका उपयोग किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 10 अतिरिक्त सेट भी उपलब्ध हैं। प्रतिदिन औसतन 15 से 20 सिजेरियन ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं।