जयपुर सम्मेलन में कोटा के नेत्र विशेषज्ञों का परचम, डॉ. सुरेश पाण्डेय और डॉ. निपुण बागरेचा की 7 पुस्तकों का हुआ विमोचन
कोटा। स्मार्ट हलचल|चिकित्सा सेवा के साथ ज्ञान-विस्तार की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कोटा के नेत्र विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। 84वां अखिल भारतीय नेत्र विज्ञान सम्मेलन के अंतर्गत ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी द्वारा जयपुर के जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर में 12 से 15 मार्च 2026 तक आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में कोटा के सुवि आई हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने विशेषज्ञता और साहित्यिक सृजन का उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। देश-विदेश से पहुंचे 10 हजार से अधिक नेत्र रोग विशेषज्ञों के बीच कोटा की भागीदारी विशेष आकर्षण रही।
सम्मेलन का प्रमुख केंद्रबिंदु सुवि आई हॉस्पिटल, कोटा के निदेशक व वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय तथा रेटिना विशेषज्ञ डॉ. निपुण बागरेचा द्वारा लिखित सात महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन रहा। इन पुस्तकों का लोकार्पण प्रो. (डॉ.) जीवन सिंह टिटियाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर देश के ख्यातिप्राप्त नेत्र विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
साहित्यिक उपलब्धियों में डॉ. सुरेश पाण्डेय की चार पुस्तकें—‘एन आई फॉर द स्काई’, ‘डायरी ऑफ एन आई सर्जन’, ‘जिंदगी का जश्न’ और ‘एंटरप्रेन्योरशिप फॉर डॉक्टर्स’—विशेष चर्चा में रहीं। वहीं डॉ. निपुण बागरेचा की ‘टाइम मैनेजमेंट फॉर डॉक्टर्स’, ‘हैंडबुक ऑफ एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजनरेशन’ और ‘वायरल रेटिनाइटिस’ का भी विमोचन किया गया। ये पुस्तकें चिकित्सा ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव का समन्वय प्रस्तुत करती हैं।
वैज्ञानिक सत्रों में डॉ. सुरेश पाण्डेय ने जटिल सर्जरी से जुड़े अनुभव साझा करते हुए ‘कठिन मामलों में फेकोइमल्सीफिकेशन’ पर इंस्ट्रक्शन कोर्स संचालित किया। बच्चों के मोतियाबिंद उपचार में ‘ज़ेप्टो नैनो पल्स तकनीक’ के उपयोग पर भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया। साथ ही, ‘टैमसुलोसिन’ दवा लेने वाले मरीजों में सर्जरी के दौरान उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और ‘फ्लॉपी आइरिस सिंड्रोम’ से बचाव के उपायों पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। ‘पीडियाट्रिक ऑप्थल्मोलॉजी’ सत्र में निर्णायक की भूमिका निभाते हुए विशेषज्ञता का परिचय दिया।
सम्मेलन में युवा चिकित्सकों के मार्गदर्शन पर भी विशेष जोर रहा। ‘यंग ऑप्थल्मोलॉजिस्ट फेलोशिप प्रोग्राम’ के अंतर्गत दोनों चिकित्सकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। पिछले पांच वर्षों में इनके निर्देशन में देशभर के 25 से अधिक युवा नेत्र रोग विशेषज्ञों को सुवि आई हॉस्पिटल, कोटा में उन्नत सर्जिकल प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।
