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क्षत्रियों की विधानसभा चुनावों मे ज़्यादा ज़्यादा भागीदारी को लेकर जयपुर में होगा देश और प्रदेश के लाखों क्षत्रियों का महापड़ाव,Kshatriya assembly elections

मदन मोहन गर्ग
Kshatriya assembly elections

गंगापुर सिटी।स्मार्ट हलचल/राजस्थान विधानसभा चुनाओं मे राष्ट्रीय राजनैतिक पार्टीयो द्वारा क्षत्रियों की सत्ता में ज़्यादा से ज़्यादा क्षत्रियों की भागीदारी, क्षत्रिय कल्याण बोर्ड, स्वर्ण आयोग और सनातन बोर्ड का गठन, क्षत्रिय क्षात्रों के लिए जिले मे होस्टल का निर्माण, महापुरुषों और वीरांगनाओं का इतिहास संरक्षित करना, जनसंख्या नियंत्रण क़ानून लागू करना, गौ हत्या रोकने हेतु कड़े क़ानून, लव जिहाद, लैंड जिहाद और धर्म परिवर्तन जिहाद रोकने हेतु कड़े क़ानून बनाना, हिंदुस्तान को हिंदू/सनातन राष्ट्र घोषित करवाना, सभी भूतपूर्व सैनिकों, अर्धसैनिक बलों और शहीदों के परिवारों को आर्थिक सहाय और सरकारी नौकरियों में प्रधानता देना, एट्रोसिटी का दुरुपयोग रोकने हेतु कड़े क़ानून बनाना और प्रोत्साहन राशि वितरण रोकना, आरक्षण मे क्रिमिलेयर का प्रावधान और समीक्षा और वंचितों को लाभ को लेकर, समान नागरिक संहिता को संपूर्ण हिंदुस्तान मे तुरंत प्रभाव से लागू करवाना, मठ मंदिरों पर से सरकार का अंकुश ख़त्म करना जैसी माँग और अन्य माँगो को लेकर क्षत्रिय करणी सेना परिवार का जयपुर में महापड़ाव होने जा रहा है। 8 अक्टूबर को दोपहर 12.15 बजे जयपुर राजस्थान मे होने वाले इस महापड़ाव में प्रदेश और देशभर के लाखों क्षत्रिय आएंगे जो अपनी कई माँगो को लेकर जंगी प्रदर्शन करेंगे। साथ ही देश भर से कई संत महात्मा भी इस महापड़ाव का हिस्सा बनेंगे।पत्रकार वार्ता में उपरोक्त जानकारी देते हुए क्षत्रिय करणी सेना परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राज शेखावत और राजस्थान के अध्यक्ष संदीप सिंह और जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह बना ने बताया कि राजनैतिक पार्टिया सालो से क्षत्रियों की उपेक्षा करती आई है। यह अब नहीं चलेगा, इसका बीड़ा क्षत्रिय करणी सेना ने उठाया है और क्षत्रिय करणी सेना परिवार के द्वारा समस्त क्षत्रियों की अध्यक्षता मे जयपुर मे क्षत्रिय एकता महापड़ाव की तैयारियां की जा रही है। इस महापड़ाव का क्षत्रियों के और समस्त सनातनियों के हितों की तरफ सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। महापड़ाव का मुख्य उद्देश्य आने वाले विधानसभा चुनावों में क्षत्रियो की ज़्यादा से ज़्यादा भागीदारी सुनिश्चित करना है। उपरोक्त माँगो पर सहमति बना कर ही महापड़ाव की पूर्णाहुति की जाएगी। सहमति नहीं बनने पर चुनावों मे क्षत्रियों द्वारा करारा जवाब इन राजनैतिक पार्टियो को दिया जाएगा।

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