रमेश चंद्र डाड
आकोला |स्मार्ट हलचल|बरूदनी क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में मानसून की बेरुखी अब किसानों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गई है। शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने कपास, मक्का, सोयाबीन, मूंग, उड़द, बाजरा सहित खरीफ फसलों की बुवाई पूरी कर ली थी, लेकिन पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेतों की नमी समाप्त हो गई है और फसलें मुरझाने लगी हैं।
किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो दोबारा बुवाई की नौबत आ सकती है। इससे किसानों पर बीज, खाद, डीजल और मजदूरी का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। पहले से बढ़ी कृषि लागत के बीच पुनः बुवाई करना अधिकांश किसानों के लिए आसान नहीं होगा। बड़लियास बरूदनी क्षेत्र के कई खेतों में फसलों की बढ़वार रुक गई है और पौधों में सूखने के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। किसान रोजाना आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं और अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि खरीफ फसलों की बेहतर वृद्धि के लिए इस समय पर्याप्त वर्षा बेहद आवश्यक है। यदि मौसम का यही रुख बना रहा तो उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जिससे किसानों को दोहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्षेत्र के किसानों ने समय रहते अच्छी बारिश होने की उम्मीद जताई है, ताकि फसलें बच सकें और खेती की मेहनत सफल हो सके।
