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लाडपुरा में यूरिया के नाम पर ‘अंधेरगर्दी’: ₹266 का कट्टा ₹400 में बेचा, व्यवस्थापक ने खोली जांच अधिकारियों के झूठ की पोल


स्मार्ट हलचल इन्वेस्टिगेशन

लाडपुरा जीएसएस में किसानों से खुली लूट: ₹266 का यूरिया ₹400 में थमाया, बिल मांगने पर मिल रहे धक्के

  • • व्यवस्थापक ने स्वीकारी ‘टैगिंग’ की मजबूरी, पर जांच अधिकारी बोले- ‘सब चंगा सी’
  • • 800 बैग पहुँचते ही उमड़ी भीड़, पुलिस की निगरानी में वितरण; जबरन सल्फर और माइक्रो राजा थोपा
📍 मांडलगढ़ / लाडपुरा (स्मार्ट हलचल)
शिव लाल जांगिड़

लाडपुरा। लाडपुरा ग्राम सेवा सहकारी समिति (जीएसएस) में शनिवार को खाद वितरण के दौरान व्यवस्था की पोल खुल गई। बुधवार को ‘स्मार्ट हलचल’ में खबर छपने के बाद शुक्रवार को 800 बैग यूरिया तो पहुँच गया, लेकिन शनिवार को वितरण के नाम पर किसानों की जेब पर डाका डाला गया। सरकारी दर ₹266.50 होने के बावजूद किसानों से ₹400 वसूले गए और विरोध करने पर उन्हें लाइन से बाहर कर दिया गया।

जांच अधिकारियों का ‘झूठ’ और व्यवस्थापक का ‘सच’

हैरानी की बात यह है कि खाद की किल्लत और वसूली की जांच करने आए अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में ‘सब चंगा सी’ कहते हुए लिखा कि किसान संतुष्ट हैं। जबकि हकीकत यह है कि समिति व्यवस्थापक कैलाश चंद्र तेली और कृषि पर्यवेक्षक रामेश्वर गुर्जर ने खुद स्वीकार किया कि ‘समिति को ऊपर से सल्फर और टैगिंग उत्पाद लेने पर ही खाद दिया जा रहा है, इसलिए वे भी इसे आगे बेचने को मजबूर हैं।’

कतार में भूखे-प्यासे किसान, पुलिस की निगरानी में वितरण

खाद की खबर लगते ही सुबह 6 बजे से ही महिलाएं और किसान कतारों में लग गए थे। सुबह 11 बजे पुलिस की निगरानी में वितरण शुरू हुआ। उपसरपंच मोहन लाल धाकड़ ने बताया कि समिति ने खाताधारक किसानों के बजाय केवल जन-आधार से वितरण किया, जिससे पुराने सदस्यों में भारी आक्रोश है। किसानों ने बताया कि ₹266.50 के कट्टे के साथ ₹134 का ‘माइक्रो राजा’ जबरन जोड़कर ₹400 लिए जा रहे हैं।

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🚜 सिर्फ खाद नहीं, ट्रैक्टर में भी ‘खेल’

समिति में लूट केवल खाद तक सीमित नहीं है। सरकार द्वारा ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ के तहत किसानों को सस्ती दरों पर जुताई के लिए दिए गए ट्रैक्टर का किराया भी बाजार दर (₹350 प्रति बीघा) वसूला जा रहा है। सरकारी सब्सिडी का लाभ किसानों को मिलने के बजाय समिति की निजी कमाई का जरिया बन गया है।

अब सवाल यह है कि जब व्यवस्थापक खुद स्वीकार कर रहे हैं, तो जांच अधिकारी किस आधार पर लीपापोती की रिपोर्ट दे रहे हैं? यह सीधे तौर पर उच्च अधिकारियों और समिति की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। क्या जिला कलेक्टर इस खुली लूट पर संज्ञान लेंगे?

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स्मार्ट हलचल न्यूज़ पेपर 31 जनवरी 2025, Smart Halchal News Paper 31 January 2025
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