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संतो से हमें मर्यादा भरा जीवन सीखने को मिलता है: राज वासदेव सिंह

नये निरंकारी सत्संग भवन आरजिया चौराहा पर विशाल आध्यात्मिक सत्संग सभा हुई आयोजित

(पंकज पोरवाल)

भीलवाड़ा। स्मार्ट हलचल/सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज की कृपा से आरजिया चैराहा स्थित नये निरंकारी सत्संग भवन पर दिल्ली से पधारे केंद्र प्रचारक श्रीमती राज वासदेव ने विशाल आध्यात्मिक सत्संग सभा को संबोधित करते हुए कहा कि, सतगुरु की कृपा से ही समझ आ जाती है जो कुछ भी सृष्टि पर हो रहा है वह सब तेरी राजा से हो रहा है हम शुक्र गुजार हैं हमें समझ आ गया तू करता है जगत का सबका पालनहार जो कुछ भी हो रहा है यह तेरे हुक्म से हो रहा है तेरी रजा से जो तू चाहता है वही होता है हमें सद्गुरु ने ब्रह्म ज्ञान देकर मायापति राजापति बना दिया है। सद्गुरु ने कहा कि एक को जानो एक को मानो यह हमारा सच्चा साथी निरंकार ही है इसे हमें कभी नहीं छोड़ता है निरंकार को जितना याद करोगे उतनी ही हमारी इस परमपिता परमात्मा से कनेक्टिविटी जुड़ी रहेगी हमारा कर्म इस निरंकार से जुड़ा रहेगा तथा हमारा मन सेवा सत्संग सुमिरन में लगा रहेगा। सतगुरु ने हमें प्यार प्रीत नम्रता वाला जीवन जीना सिखाया है हमें दूसरे के प्रति नफरत घृणा नहीं रखनी है हमारा ध्यान, गुरु के चरणों की तरफ जुड़ा रहेगा हमारा श्वास श्वास सेवा सत्संग सुमिरन में लगा रहेगा। सत्संग के मध्य से पधारे वासुदेव सिंह ने सत्संग सभा में कहां की सद्गुरु हमें यही सिखाता है कि मानवता से प्यार करो सुकून सिर्फ और सिर्फ सतगुरु के पास ही मिलता है मानव बनकर इस धरती पर पैदा हुए हैं मानवता के लिए हमें क्या कर्म करना है मानव को संतों की चरणों से ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति कर अपना प्यार भरा जीवन जीना है। संतो से हमें मर्यादा भरा जीवन सीखने को मिलता है। हमारे जीवन में जो सद्गुरु के आदेश उपदेश आए वही हमें कार्य करना है। मर्यादा में रहकर सहनशीलता भरा जीवन जीना है। जिन्होंने हमें अंधकार से प्रकाश की ओर स्थापित किया ऐसे गुरु को नमन करता हूं जो पिता के रूप में माता के रूप में संरक्षण दिया है मेरे अवगुणों का नाश किया हर मुश्किलों का अंत है। सतगुरु तन भी सद्गुरु का मन भी सतगुरु का सतगुरु कभी कृष्ण के रूप में आए कभी मीरा के रूप में आए कभी बाबा हरदेव के रूप में आए आज सतगुरु माता सुदीक्षा के रूप में हमें संरक्षण दे रहे हैं व सुरक्षा दे रहे हैं और हमारा हाथ पड़कर मंजिल के मकसूद तक पहुंचा रहे। सत्संग के मध्य दिल्ली से पधारे राज वासदेव सिंह एवं वासुदेव सिंह स्थानीय जोनल इंचार्ज संत जगपाल सिंह ने सोल एवं दुपट्टा पहनाकर कर अभिनंदन किया तथा साथ संगत का हृदय से आभार प्रकट किया।

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