नगर परिषद का कमाल, पीडब्ल्यूडी की भूमि पर बना दिया पट्टा, निर्माण के लिए दे दी स्वीकृति
हालात:- जिस भूमि पर पट्टा जारी किया उसे परिषद ने पीडब्ल्यूडी की बताकर अन्य लोगो की अटका रखी 200 फाइले।
बून्दी।स्मार्ट हलचल/नगर परिषद प्रशासन द्वारा तत्कालीन कांग्रेस सरकार के अंतिम 6 माह के भीतर बाई पास रोड़ पर आर्य समाज के सामने पीडब्ल्यूडी की भूमि पर पट्टा बनाये जाने का मामला सामने आया है। यह पट्टा स्वायत शासन विभाग द्वारा जारी की गई गाइड लाइन के काफी विपरीत जाकर बनाया गया है। इसमें सबसे मुख्य बात तो यह है कि पट्टे पर जारी की गई निर्माण स्वीकृति से कई गुना बड़ा एक व्यवसायिक भवन का निर्माण तेज गति से चल रहा है। ऐसा भी नही है कि नगर परिषद अधिकारियों को मामले की जानकारी नही है। कार्यवाहक आयुक्त भावना सिंह को जानकारी होने के बावजूद कोई कार्यवाही नही की जा रही है। अधिकारियों की मिलीभगत से अब अवैध निर्माण असमान छूने को है।
कलेक्टर को मिली थी शिकायत
इस पट्टे की शिकायत गत माह जिला कलेक्टर को मिली थी तो उन्होंने नगर परिषद की कार्यवाहक आयुक्त भावना सिंह, नगर परिषद के एटीपी नरेंद्र वर्मा को सम्बंधित पट्टा फाइल के साथ तलब किया था। हालांकि कलेक्टर ने आश्चर्य जताया था कि जब इस एरिया में नगर परिषद द्वारा पीडब्ल्यूडी की भूमि का हवाला देकर पट्टे नही बनाये गए थे तो फिर यह पट्टा कैसे बन गया? तभी कार्यवाहक आयुक्त ने बताया था कि पट्टा तत्कालीन आयुक्त महावीर सिंह और सभापति के हस्ताक्षर के बाद ही जारी हुआ है। बाद में कलेक्टर ने उक्त निर्माण कार्य को यथास्थिति रखने के निर्देश दिए थे। लेकिन कार्यवाहक आयुक्त की अनदेखी के चलते यहा निर्माण कार्य लगातार जारी रहा। वर्तमान में आगे की दो दुकानों को ध्वस्त कर पीछे की और एक बड़ा व्यवसायिक भवन बनाकर खड़ा कर दिया गया। लेकिन नगर परिषद प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई है।
200 से अधिक पट्टा फाइल आज भी खा रही धूल
तत्कालीन गहलोत सरकार द्वारा चलाये गए प्रशासन शहरों के संग अभियान के दौरान बून्दी में नगर परिषद द्वारा हजारो पट्टे बनाये गए। जिसमे कृषि, अतिक्रमण, 69ए, स्टेट ग्रांड सहित कई पट्टे शामिल है। सरकार द्वारा सभी तरह के पट्टो के लिए अलग अलग गाइड लाइन जारी की गई थी। उसी के अनुसार ही पट्टे बनाये गए थे। जब बाई पास क्षेत्र से चित्तौड़ तिराहे से अंदर का एरिया के लोगो ने (जो कई सालों से निवास कर रहे है) ने अपने अपने मकानों के पट्टे बनाने के लिए फाइल लगाई तो नगर परिषद प्रशासन ने क्षेत्र को पीडब्ल्यूडी में होना बताते हुए सैकड़ो पट्टा फाइलो को केंसिल कर दिया था। वो तमाम फाइलें आज तक कोई निर्णय नही होने से धूल खा रही है। जो वर्षो पूर्व के मकान पीडब्ल्यूडी की जद में नही आ रहे थे उनके जरूर पट्टे नगर परिषद द्वारा जारी किए गए थे।
वहा केवल वर्षो से कब्जा कर मकान बनाकर रह रहे लोगो को ही सरकार द्वारा अभियान में लीज राशि जमा कर तय मापदंडों के अनुसार पट्टे जारी किए गए थे। हालांकि क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा पीडब्ल्यूडी में होना बताते हुए कई लोगो के पट्टे आज भी नही बन पाए है। अब समझ ये नही आ रहा है जो पट्टा जारी किया गया है। वह किस गाइड लाइन के अनुसार किया गया है। सरकार की गाइड लाइन में तो कृषि भूमि पर ही केवल खाली भूखण्ड का पट्टा दिया जा सकता है। जबकि इस मामले में नगर परिषद के अधिकारियों ने सरकार की गाइड लाइन से विपरीत जाकर ही पीडब्ल्यूडी की भूमि पर पट्टा जारी कर एक नया इतिहास बना दिया है।
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हमने पट्टे पर नियमनुसार निर्माण स्वीकृति जारी की थी। यह सही है कि पट्टे को लेकर कलेक्टर साहब ने हमे बुलाया था। इसमे निर्माण स्वीकृति पट्टे के आधार पर जारी की है। पट्टा सही है या नही ये आयुक्त ही बता सकते है। मौका देखने का काम जेईएन का होता है। साइज तो फ़ाइल देख कर ही बता सकता हूं।
नरेंद्र कुमार वर्मा
एटीपी, नगर परिषद बून्दी
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मामले की एसीबी में शिकायत करेंगे। तत्कालीन आयुक्त महावीर सिंह के पूरे कार्यकाल की जांच होनी चाहिए। अगर नगर परिषद प्रशासन पट्टे ही बना रहा है तो उक्त एरिया को पीडब्ल्यूडी का बताकर 200 से अधिक लोगो की फाइलों को क्यो रोका हुआ है। उनके भी पट्टे जारी होने चाहिए।
प्रेम प्रकाश एवरग्रीन
क्षेत्रीय पार्षद बून्दी













