मोह-माया छोड़ समूची सृष्टि से प्रेम करें, यही सच्ची भक्ति : संत नवनिधराम

रामनिवास धाम में रामस्नेही संप्रदाय के चातुर्मास का समापन, सेवा कार्यों की परंपरा जारी रखने का संकल्प

शाहपुरा मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल|रामस्नेही संप्रदाय की मुख्यपीठ रामनिवास धाम में चातुर्मास का समापन परंपरागत विधि-विधान के साथ हुआ। बारादरी में आयोजित समारोह में कार्यवाहक भंडारी संत नवनिधराम महाराज और संत मस्तराम महाराज के चातुर्मास की पूर्णता पर सर्व रामस्नेही सत्संगीजनों की मौजूदगी में समापन की घोषणा की गई। इस दौरान गादीजी की आरती-वंदना की गई। संतवाणी के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेम, करुणा, समभाव और सेवा का संदेश दिया गया।
समारोह में कार्यवाहक भंडारी संत नवनिधराम महाराज ने कहा कि मोह-माया में उलझे रहना ही अज्ञान है। किसी वस्तु को ‘मेरी वस्तु’ मानकर उससे मोह रखना माया है। केवल अपने परिवार और अपने लोगों से प्रेम करना भी इसी सीमित भाव का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि समूची धरती पर रहने वाले सभी मनुष्यों और सभी धर्मों के लोगों से प्रेम करना ही दया और भक्ति का वास्तविक स्वरूप है। सच्ची भक्ति वही है, जिसमें मनुष्य भेदभाव से ऊपर उठकर सभी के प्रति करुणा और सद्भाव रखे।
चातुर्मास में सत्संग और साधना से मिलता है मार्गदर्शन
संत नवनिधराम महाराज ने कहा कि रामस्नेही संप्रदाय में चातुर्मास की परंपरा का लंबा इतिहास है। इस अवधि में गुरु और आराध्य की स्तुति, जप-तप, आराधना, सत्संग और कथा के आयोजन होते हैं। इनसे समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिलता है। चातुर्मास आत्मचिंतन के साथ जीवन में सदाचार और सेवा के भाव को मजबूत करने का अवसर भी है।
2011 से सेवा कार्यों की परंपरा जारी
संत नवनिधराम महाराज ने बताया कि शाहपुरा में वर्ष 2011 से श्रीजी महाराज की जयंती और निर्वाण महोत्सव के आयोजन के साथ उनकी स्मृति में जरूरतमंदों को राशन सामग्री, कंबल और विद्यार्थियों को पाठ्यसामग्री वितरित करने सहित कई सेवा कार्य किए जा रहे हैं। रामस्नेही अनुरागियों के सहयोग और प्रेरणा से ये आयोजन शाहपुरा की धार्मिक-सामाजिक परंपरा का हिस्सा बन गए हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि शाहपुरा और अन्य स्थानों के रामस्नेही अनुरागियों के सहयोग से सेवा गतिविधियों का यह क्रम आगे भी जारी रहेगा।
समारोह में सूर्यप्रकाश बिड़ला, कैलाशचंद्र तोषनीवाल, रामेश्वरलाल बसेर, राकेश सोमाणी, रामकल्याण सोमाणी, दीनदयाल मारू, महावीर जागेटिया और रामसहाय बिड़ला सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।