कोटड़ी के इतिहास में दिगम्बर सन्तों के पहले चातुर्मास का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश

कोटड़ी के इतिहास में दिगम्बर सन्तों के पहले चातुर्मास का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश

:- जीवन का कल्याण करना है तो धर्म को अपनाना होगा: श्रद्धानंदीजी महाराज
:- चातुर्मास पर मंगल कलश स्थापना 25 को
स्मार्ट हलचल, राजेन्द्र बबलू पोखरना
कोटड़ी|
धार्मिक नगरी कोटड़ी के इतिहास में दिगम्बर जैन सन्तों के पहले चातुर्मास का एतिहासिक मंगल प्रवेश आयोजित हुआ। अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्रीवसुनंदीजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य श्रद्धानन्दी महाराज एवं पवित्रानन्दी जी महाराज का 6वां पावन वर्षावास 2021 के लिए 1100 किमी की पैदल यात्रा कर नन्दराय मार्ग के देवरिया से विहार कर सेठी फार्म हाउस, नाकोड़ा पेट्रोल पम्प होते हुए चारभुजा मार्ग से सदर बाजार पंहुचे। कोरोना गाइडलाईन की पालना करते हुए श्रावक-श्राविकाओं ने अपने घरों के बाहर रंगोली सजाई तथा परिवार के साथ जयकारे लगाते हुए संतो का मंगल प्रवेश कराया। साथ ही पहलीबार संत के घर के बाहर पधारने पर उत्तम भावों से परिवार के साथ उपस्थित हो कर संतों का पाद पक्षाल कर श्रद्धालूओं ने धन्य महसूस किया। प्रवेश यात्रा में सरीक कुछ महिला-पुरूष जयकारा लगाते हुए कोटड़ी सदर बाजार स्थित श्रीशीतलनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर पंहुचे। जहां भगवान श्रीशीतलनाथ सहित अन्य भगवान की मूर्ति पर पक्षाल कर पूजा अर्चना की। वहीं ओसवाल समाज के द्वारा भी श्रीआदिनाथ स्वेतांबर जैन मन्दिर किे बाहर दिगंबर संतो का पाद पक्षाल कर मन्दिर में आने का न्यौता दिया जिसे संतो ने स्वीकार करते हुए मन्दिर में उपस्थित होकर प्रभू श्रीआदिनाथ के दर्शन किए। मन्दिर में धर्म आराधना के बाद मंशा रोड़ पर विद्यासागर वाटिका में पंहुचें जहां सजे-धजे श्रावक-श्राविकाओं ने संतो को चातुर्मास के लिए भव्य प्रवेश कराया। वहीं श्रीशीतलनाथ दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष नेमी चन्द पाठोदी, चातुर्मास समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार सेठी सहित सभी पदाधिकारियों ने श्रीफल भेंट कर चातुर्मास में विराजने का आग्रह किया। कोरोना गाइडलाईन की पालना को लेकर दिगम्बर, स्वेताम्बर, माहेश्वरी सहित अन्य समाज के लोगों ने अपने घरों के बाहर सजधज कर परिवार के साथ उपस्थित हो संतो का आशीर्वाद लिया। समाज के कोषाध्यक्ष ऋषभ कुमार गोधा ने बताया कि आगामी 24 जुलाई को गुरू पूर्णिमा व वीर शासन जयंती पर शीतलनाथ मन्दिर में शान्तिधारा विधान व चातुर्मास स्थल पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जबकि 25 जुलाई को चातुर्मास को लेकर मंगल कलश स्थापना की जाएगी। जिसमें चान्दी के मुख्य कलश व अन्य चार रजत कलश स्थापित किए जाएगे। चातुर्मास में आयोजित अनेक धार्मिक कार्यक्रमों में विधानाचार्य कोमल शास्त्री नसीराबाद एवं संगीतकार सत्येन्द्र जैन एण्ड पार्टी मानपुरा उपस्थित होंगे। धर्मसभा के दौरान महिला मण्डल तथा बालिका मण्डल की ओर से संतों के आगमन पर गीत व भजन पर नृत्य प्रस्तूत किया। कार्यक्रम का संचालन बसंता पाठोदी, पिंकी कासलीवाल जितेन्द्र कुमार सेठी ने किया। प्रवेश में प्रधान करण सिंह कानावत, पूर्व प्रधान जमना लाल डीडवानिया, भाजपा मण्डल अध्यक्ष प्रहलाद सेन, स्वेतांबर समाज के अध्यक्ष नवरतनमल पोखरना, मंत्री विरेन्द्र लोढ़ा, पंचायत समिति सदस्य राजेन्द्र तेली, दिगंबर जैन समाज के भीलवाड़ा, जयपुर, अजमेर, बून्दी, कोटा जिले सहित स्थानीय श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे। कोरोना गाइडलाईन की पालना के लिए तहसीलदार लोकेश चौधरी, थाना प्रभारी राजेन्द्र कुमार नायक ने प्रवेश के दौरान कस्बे के लोगों से आग्रह करते नजर आए।
जीवन का कल्याण करना है तो धर्म को अपनाना होगा: श्रद्धानंदीजी महाराज
जीवन का कल्याण करने के लिए धर्म को अपनाना होगा। व्यक्ति मोक्ष में जाने की कामना तो करता है परन्तु धर्म से परे रह कर जो कि संभव नहीं है। मोक्ष के लिए धर्म आवश्यक है ओर धर्म को अपनाने के लिए संतो का सानिध्य जरूरी है। व्यक्ति आत्मा का कल्याण तो करना चाहता है परन्तु होगा कैसे इसके बारे में जानकारी नहीं है। आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए चातुर्मास पर आयोजित वर्चुअल धर्मचर्चा के दौरान विस्तार से बताने की बात चातुर्मास प्रवेश के बाद वर्चुअल धर्म सभा को संबोधित करते हुए पूज्य संत श्रद्धानन्दीजी महाराज ने कहे। उन्होने कहा कि जीवन तो पक्षी भी गुजारते है परन्तु मोक्ष मनुष्य पर्याय को ही प्राप्त हो सकता है। पक्षी अपने परिवार को पालने व आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सुबह से ही निकल जाता है यही काम मनुष्य भी कर रहा है। मनुष्य अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ ही धर्म को अपना ले तो उसका मानव जीवन सफल हो जाता है।उन्होने कहा कि कोटड़ी में चातुर्मास किसी एक पंत का नहीं बल्कि महावीर की मुद्रा में संत का हुआ है इसका लाभ सभी समाज को लेना है। संत का काम इन्सान को धर्म से जोड़ कर भगवान बनाने का है। धर्म आराधना में जीवन को जोड़ कर आत्मा को मोक्षगामी बनाने का प्रयास करें। वहीं पवित्रानन्दीजी महाराज ने भगवान महावीर के सिद्धान्त अहिंसा परमो धर्म: को अपना कर असंख्य जीवों की हिंसा होने से रोका जा सकता है। उन्होने भगवान महावीर की जीवनी पर प्रकाश डाला। चातुर्मास प्रवेश के बाद संतों का पहला पाद पक्षाल अभयकुमार, विद्या कुमार मनोज सेठी परिवार ने किया।

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