दिनेश लेखी
बैंड-बाजे और डीजे की धुन पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, महिला-पुरुषों ने सामूहिक रूप से पूरी की परिक्रमा
कठूमर। स्मार्ट हलचल|कस्बे में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी धार्मिक श्रद्धा और उत्साह के साथ पूरे कस्बे की परिक्रमा लगाई गई। परिक्रमा में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भाग लिया। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की रथयात्रा निकाली गई। बैंड-बाजे और डीजे की भक्तिमय धुनों के बीच निकली यात्रा से कस्बे का माहौल धर्ममय हो गया। श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ परिक्रमा में शामिल हुए और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा।
शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इस धार्मिक परंपरा का कस्बे में विशेष महत्व है। हर वर्ष इस दिन श्रद्धालु एकत्र होकर पूरे गांव की परिक्रमा करते हैं। इस आयोजन में महिला और पुरुषों की सामूहिक भागीदारी सामाजिक एकता, धार्मिक आस्था और आपसी भाईचारे का संदेश देती है। भगवान श्रीकृष्ण की रथयात्रा परिक्रमा का मुख्य आकर्षण रही। श्रद्धालुओं ने रथयात्रा में शामिल होकर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।
हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व वाला पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखाई देता है। इसे शरद ऋतु के आगमन, भक्ति और उल्लास से जोड़कर देखा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की आराधना और रासलीला की परंपरा के कारण भी इस पूर्णिमा का विशेष महत्व है। अनेक स्थानों पर श्रद्धालु रात्रि में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।
कठूमर में निकाली गई परिक्रमा इसी धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रतीक रही। महिला-पुरुषों ने मिलकर पूरे कस्बे की परिक्रमा कर धार्मिक आयोजन में सहभागिता निभाई। बैंड-बाजे और डीजे के साथ आगे बढ़ती रथयात्रा ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस आयोजन के माध्यम से लोगों ने अपनी धार्मिक परंपराओं को जीवंत रखने और नई पीढ़ी तक संस्कार पहुंचाने का संदेश दिया।
शरद पूर्णिमा पर हर वर्ष आयोजित होने वाली यह परिक्रमा कठूमर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सामूहिक रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने आस्था, एकजुटता और परंपरा के प्रति लोगों के जुड़ाव को दर्शाया।