अनिल कुमार
ब्यावर -स्मार्ट हलचल| राजियावास गांव में मंगलवार को एक अनोखी, भावुक और मानवीय संवेदनाओं से भरी घटना देखने को मिली। गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर बिना बुलाए अंतिम यात्रा में शामिल होने वाला एक वफादार कुत्ता जब स्वयं इस दुनिया से विदा हुआ, तो पूरे गांव ने उसे अपने परिवार के सदस्य की तरह अंतिम विदाई दी।
ग्रामीणों के अनुसार यह कुत्ता गांव में जब भी किसी की मृत्यु होती, स्वतः मृतक के घर पहुंच जाता था। वह न केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता, बल्कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार और शोकसभा सम्पन्न होने तक वहीं मौजूद रहता था। वर्षों से चले आ रहे इस निस्वार्थ और संवेदनशील व्यवहार ने कुत्ते को गांववासियों के दिलों में विशेष स्थान दिला दिया था।
गांव के सरपंच ब्रजपालसिंह रावत ने बताया कि मंगलवार सुबह अज्ञात कारणों से यह कुत्ता सड़क किनारे मृत अवस्था में मिला। इसकी सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से गांव में फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई। इसके बाद ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि इस वफादार कुत्ते का विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाएगा।
कुत्ते की अंतिम यात्रा सुबह ग्यारह बजे आशापुरा माता मंदिर से डीजे साउंड पर रामधुन के साथ प्रारंभ हुई, जो राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची। वहां पूरे विधि-विधान और श्रद्धा भाव के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे और सभी की आंखें नम आईं।
इस अनोखे कुत्ते का उठावना आज शाम को आशापुरा माता मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में रखा गया है, वहीं इसका बारहवां कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। यह घटना गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है और मानव व पशु के बीच संवेदनशील रिश्ते की मिसाल पेश कर रही है।


