रविंद्र आर्य
स्मार्ट हलचल|दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्वी दिल्ली के गाज़ीपुर मंडी एवं डेरी फार्म क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर निर्णायक आदेश पारित करते हुए अवैध कब्ज़ों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। माननीय उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता मनोज भाटी एवं धर्मेंद्र दास द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए क्षेत्र में बनी अवैध झुग्गी-झोपड़ियों तथा अन्य अनधिकृत संरचनाओं को हटाने के निर्देश जारी किए हैं।
यह आदेश केस संख्या W.P.(C)–676/2026, दिनांक 19 जनवरी 2026, को माननीय न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ द्वारा पारित किया गया।
*30,000 वर्ग मीटर भूमि से हटेंगे अवैध कब्ज़े*
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह मामला एक बड़े भू-भाग से संबंधित है। गाज़ीपुर मंडी–डेरी फार्म क्षेत्र के बी, सी और डी ब्लॉक के आसपास लगभग 30,000 वर्ग मीटर भूमि पर फैली अवैध झुग्गी-झोपड़ियों एवं अनधिकृत निर्माणों को अधिकतम 12 सप्ताह के भीतर हटाया जाना अनिवार्य होगा।
इस क्षेत्र में कथित रूप से बनी
अवैध नूरानी मस्जिद,जामिया 96 मस्जिद सहित अन्य संरचनाएँ भी इस कार्रवाई के दायरे में आएंगी।
हालाँकि न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि चूँकि इस कार्रवाई में कई सरकारी विभागों की समन्वित भूमिका आवश्यक है, इसलिए प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है।
*DUSIB की भूमि पर सुनियोजित अतिक्रमण*
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवादित भूमि दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) के अधीन है। याचिका में आरोप लगाया गया कि इस सरकारी भूमि पर योजनाबद्ध तरीके से अवैध कब्ज़ा किया गया।
शिकायत के अनुसार—
प्रारंभ में जहाँ लगभग 500 झुग्गियाँ थीं
वहाँ यह संख्या बढ़कर 5,500 से अधिक झुग्गी-झोपड़ियों तक पहुँच गई
कुल मिलाकर लगभग 36,000 गज भूमि पर अवैध कब्ज़ा कर लिया गया
10×10 फुट से 500 गज तक फैला कब्ज़ा
गाज़ीपुर डेरी फार्म क्षेत्र में झुग्गीवासियों को जिन 10×10 फुट के अस्थायी ढाँचों की अनुमति थी, उन्हें बढ़ाकर 500–500 गज तक फैला दिया गया। इसके बाद कई स्थानों पर तीन मंज़िला पक्के मकानों का निर्माण कर सैकड़ों अवैध कब्ज़े स्थापित कर दिए गए।
STF द्वारा संयुक्त कार्रवाई
माननीय हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार—
नगर निगम (MCD)
लोक निर्माण विभाग (PWD)
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA)
की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) संयुक्त रूप से कार्रवाई करेगी। अवैध कब्ज़ों को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा और आगे की पूरी प्रक्रिया कानून के अनुरूप संपन्न की जाएगी।
*प्रशासनिक प्रभाव*
इस आदेश को पूर्वी दिल्ली एवं संपूर्ण एनसीआर क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कानूनी हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। अब संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों पर यह जिम्मेदारी होगी कि वे न्यायालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करें।
*याचिकाकर्ता का पक्ष और चेतावनी*
याचिकाकर्ता मनोज भाटी ने आशंका जताई है कि कार्रवाई के पश्चात कुछ अवैध अप्रवासी, जिनके पास फर्जी अथवा डुप्लीकेट पहचान दस्तावेज़ होने का संदेह है तथा जिनके म्यांमार एवं बांग्लादेश से जुड़े होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, वे आदेश के बाद गुप्त रूप से गाज़ियाबाद, नोएडा और लोनी सीमा क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित हो सकते हैं।
उन्होंने दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश प्रशासन से सख्त निगरानी, दस्तावेज़ सत्यापन और सतर्कता बरतने की माँग की है।
*अदालत में प्रस्तुत महत्वपूर्ण तथ्य*
इस मामले में DUSIB, MCD और PWD के अधिवक्ताओं ने एसडीएम विनोद कुमार द्वारा पारित पूर्व आदेश का समर्थन किया।
याचिकाकर्ता पक्ष ने भी उसी आदेश के आधार पर यह तर्क रखा कि—
*“500 झुग्गियों को बढ़ाकर 5,500 झुग्गी-झोपड़ियों में परिवर्तित करना न तो कानूनी है और न ही न्यायसंगत।”*
माननीय उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनते हुए पूर्व आदेश को वैध माना और संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए।
*उपराज्यपाल को शिकायत से खुला मामला*
यह मामला तब प्रकाश में आया, जब स्थानीय नागरिकों ने दिल्ली के उपराज्यपाल के आधिकारिक ऐप पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गाज़ीपुर मंडी एवं डेरी फार्म क्षेत्र के बी, सी और डी ब्लॉक में DUSIB की लगभग 30,000 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर सुनियोजित तरीके से अवैध कब्ज़ा किया गया है।
*शिकायत के अनुसार*—
बी-ब्लॉक, गली नंबर 6 में पावर हाउस के पीछे लगभग 15,000 वर्ग मीटर भूमि पर अवैध झुग्गी झोपड़ी संचालित की जा रही हैं
पावर हाउस ओर श्मशान घाट के पास लगभग 25 बीघा भूमि पर 100 से 150 झुग्गियाँ अभी बसाई गई हैं
अस्थायी ढाँचों को सैकड़ों गज में फैला दिया गया है
इन अवैध कब्ज़ों से हर माह लाखों रुपये की अवैध वसूली किए जाने का भी आरोप है। शिकायत में पी अफ आई (PFI) जैसे प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) की सक्रियता की आशंका भी व्यक्त की गई।
आरोप है कि मजहबी पहचान की आड़ में सरकारी भूमि पर कब्ज़ा कर अस्थायी ढाँचों को अवैध मस्जिदों और मदरसों में परिवर्तित किया गया। इसके अतिरिक्त, गाज़ीपुर डेरी / मंडी और आनंद विहार क्षेत्र में नकली आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी के माध्यम से अवैध प्रवासियों को बसाए जाने को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया।
इन्हीं शिकायतों के आधार पर यह मामला न्यायालय तक पहुँचा, जिसके बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश से कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
लेखक: रविंद्र आर्य
याचिकाकर्ता: मनोज भाटी
+91 98998 80288













