स्मार्ट हलचल।धौलपुर रीको औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक नामचीन सर्जीकल ग्लब्स फैक्ट्री पर बड़ी कानूनी कार्रवाई हुई है। जहां कॉपीराइट एक्ट का उल्लंघन करने के मामले में एफ-374 रीको ग्रोथ सेंटर एक्सटेंशन स्थित स्वयेर हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड नाम की सर्जीकल ग्लब्स फैक्ट्री पर गाज गिरी है। बताया जा रहा है कि जिसके मालिक संजीव गौड़ हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने 25 मई 2026 एवं 22 जून 2026 को जिला न्यायालय धौलपुर को सख्त आदेश दिए थे कि 7 अगस्त 2021 के आदेश को पुनर्जीवित कर फैक्ट्री की दोनों सर्जीकल ग्लब्स मशीनों को कुर्क व सीज किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय के उन्हीं आदेशों की अनुपालना में जिला एवं सत्र न्यायालय धौलपुर के न्यायाधीश संजीव मागो ने सर्जीकल ग्लब्स फैक्ट्री स्वयेर हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड की 2 बड़ी मशीनों को कुर्क कर सील करने के आदेश दिए। इसके बाद कोर्ट के कुर्की वारंट की तामील करते हुए मौके पर पहुंचे न्यायिक अमले ने फैक्ट्री की दो मुख्य मशीनों को कुर्क कर सील कर दिया है।मिली जानकारी के अनुसार उक्त फैक्ट्री द्वारा मैसर्स अनोन्दिता हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड के डिजाइन का अवैध रूप से इस्तेमाल कर सर्जीकल ग्लब्स तैयार किए जा रहे थे। इसे बौद्धिक संपदा अधिकार का सीधा उल्लंघन मानते हुए पीड़ित पक्ष ने न्यायालय की शरण ली थी। जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उक्त फैक्ट्री के खिलाफ कुर्की के कड़े आदेश जारी किए। न्यायालय के आदेश पर नियुक्त कमिश्नर/सेल अमीन की टीम भारी पुलिस बल के साथ जब रीको स्थित ग्लब्स फैक्ट्री पहुँची, तो वहां हड़कंप मच गया। टीम ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उत्पादन कार्य में इस्तेमाल हो रही 2 बड़ी सर्जीकल ग्लब्स मशीनों को अपने कब्जे में लिया, उनकी कुर्की की। साथ ही मशीनों को पूरी तरह चैन डालकर व ताला लगाते हुए कोर्ट की मोहर सील लगाकर सील कर दी हैं। अब इन दोनों मशीनों से किसी भी प्रकार का उत्पादन नहीं किया जा सकेगा। इस दौरान मैसर्स अनोन्दिता हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के वकील श्रीकांत श्रीवास्तव, कमल लोधी और अनस खान सहित कंपनी के प्रतिनिधि के चंद्रपाल चौधरी मौके पर मौजूद रहे। रीको इंडस्ट्रियल एरिया में हुई इस कार्रवाई से स्थानीय उद्योगपतियों और व्यवसायियों में खलबली मच गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रांड्स की पायरेसी और कॉपीराइट उल्लंघन के मामलों में कोर्ट अब बेहद सख्त रुख अपना रहा है, जिससे नकली या कॉपी उत्पाद बनाने वालों पर लगाम कसी जा सके। बता दें कि जब कोई संस्थान किसी दूसरे के रजिस्टर्ड ब्रांड नेम, लोगो, या पेटेंट डिजाइन की हूबहू नकल कर बाजार में माल बेचता है, तो यह कानूनी अपराध है।
