मां की स्मृति में समरसता का महासंगमः तहनाल बना सामाजिक एकता का तीर्थस्थल

शाहपुरा-मूलचन्द पेसवानी

शाहपुरा तहसील का तहनाल गांव आस्था, भावनाओं और सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल बनकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। शनिवार को यहां का माहौल कुछ अलग ही नजर आ रहा है हर गली, हर चौपाल पर एक ही चर्चा३ “मां के नाम पर इतना बड़ा आयोजन, सच में अद्भुत!”
शाहपुरा तहसील के मूल निवासी और देशभर में ख्यातनाम ज्योतिष व वास्तु विशेषज्ञ हेमराज लढ़ा ने अपनी माताजी स्वर्गीय सोहनदेवी की स्मृति में ऐसा आयोजन किया है, जिसने पूरे समाज को एक जाजम पर ला खड़ा किया है। स्प्टम् तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि गांव में मानो सामाजिक एकता का मेला लगा हो।
सुबह से ही तहनाल में लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दूर से आए समाजबंधु, रिश्तेदार और ग्रामीण एक ही भाव के साथ यहां पहुंचेकृमां के आशीर्वाद और सामाजिक एकता के संदेश को आत्मसात करने। घर-घर से महिलाएं सजधज कर आईं और जैसे ही उन्होंने माताजी की प्रतिमा के दर्शन किए, कई आंखें नम हो गईं।
हेमराज लढ़ा ने अपनी माताजी की प्रतिमा विशेष रूप से वियतनाम से पत्थर मंगवाकर तैयार करवाई और उसे अपने घर में स्थापित किया। प्रतिमा के सामने श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं। हर व्यक्ति सिर झुकाकर आशीर्वाद ले रहा है, और माहौल पूरी तरह भावनात्मक हो गया है। आज आयोजित श्री चारभुजानाथ महाराज की प्रसादी में सैकड़ों लोग एक साथ पंगत में बैठे नजर आए। यह दृश्य अपने आप में सामाजिक समरसता की जीवंत तस्वीर बन गया जहां जाति, वर्ग और भेदभाव की दीवारें पूरी तरह टूटती दिखीं।
हेमराज लढ़ा ने बताया कि “आज के वैश्विक दौर में हमारी सामाजिक परम्पराएं धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं। ऐसे में यह आयोजन एक प्रयास है उन परम्पराओं को फिर से जीवित करने का।” उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल माताजी को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को हमारी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना भी है।
गौरतलब है कि इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में शाहपुरा तहसील के तहनाल ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी जाति वर्गों के परिवारों को आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही माहेश्वरी समाज के करीब 125 गांवों के बंधुओं को भी न्योता दिया गया है। पहले दिन ही भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। हेमराज लढ़ा की माताजी सोहनदेवी ने 106 वर्ष की दीर्घायु प्राप्त की थी और जीवनभर सभी को मिल-जुलकर रहने की प्रेरणा दी। उनके इसी संदेश को जीवंत रखने के लिए यह आयोजन किया गया है, जो अब पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बन गया है। आयोजन में हर उम्र के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। युवा वर्ग जहां व्यवस्था संभाल रहा है, वहीं बुजुर्ग अपने अनुभवों के साथ इस पहल की सराहना कर रहे हैं।

हेमराज लढ़ा, जो वर्तमान में अहमदाबाद में निवासरत हैं, अपने तीनों पुत्रों विकास, अभिषेक और रोहित के साथ इस आयोजन में पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं। परिवार की यह एकजुटता भी लोगों के लिए मिसाल बन रही है। इस आयोजन की खास बात यह भी है कि हेमराज लढ़ा के घर पर पिछले 36 वर्षों से माताजी की अखंड ज्योत प्रज्वलित है, जो उनकी मातृभक्ति और देवीभक्ति का प्रमाण है। आज वही भक्ति सामाजिक एकता के रूप में पूरे क्षेत्र में प्रकाश फैला रही है।