माण्डलगढ़ में जनता की गाढ़ी कमाई पर चाटुकारिता का ‘महोत्सव’: नगर पालिका ने सांस्कृतिक संध्या के नाम पर फूंके लाखों, विधायक पुत्र के स्वागत में रुकी प्रस्तुतियां; अश्लीलता और बोरियत से खाली हुआ पंडाल

माण्डलगढ़ में जनता की गाढ़ी कमाई पर चाटुकारिता का ‘महोत्सव’: नगर पालिका ने सांस्कृतिक संध्या के नाम पर फूंके लाखों, विधायक पुत्र के स्वागत में रुकी प्रस्तुतियां; अश्लीलता और बोरियत से खाली हुआ पंडाल

सांस्कृतिक कार्यक्रम या कार्यकर्ताओं का परिचय सम्मेलन? रात 10 बजे तक चला माल्यार्पण का तमाशा; सांस्कृतिक मर्यादाएं तार-तार होने और वीआईपी कल्चर से हताश होकर कुर्सियां छोड़ भागी जनता

माण्डलगढ़ (स्मार्ट हलचल)

माण्डलगढ़ नगर पालिका द्वारा दशहरा महोत्सव के नाम पर जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई और लाखों रुपये के भारी-भरकम टेंडरों की कैसी दुर्दशा की जाती है, इसका शर्मनाक नजारा दशहरा मैदान में आयोजित तथाकथित सांस्कृतिक संध्या में देखने को मिला। पारिवारिक मनोरंजन और लोक संस्कृति की उम्मीद लेकर पंडाल में बैठी जनता को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के नाम पर केवल नेताओं की चाटुकारिता, स्थानीय कार्यकर्ताओं के अंतहीन स्वागत का तमाशा और मंच पर अश्लीलता परोसी गई। नतीजा यह रहा कि जनता हताश होकर बीच कार्यक्रम में ही मैदान खाली कर चली गई।

लाखों फूंके, पर कार्यक्रम बना कार्यकर्ताओं का परिचय सम्मेलन

नगर पालिका प्रशासन ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए, लेकिन धरातल पर कार्यक्रम को भाजपा के गली-मोहल्ले के कार्यकर्ताओं का ‘परिचय सम्मेलन’ बनाकर छोड़ दिया गया। शाम 8:15 बजे का समय तय था, लेकिन कार्यक्रम घंटों की देरी से शुरू हुआ। हद तो यह हो गई कि रात 10 बजे तक मंच से केवल साफा बंधवाने और माल्यार्पण की नौटंकी ही चलती रही, जिससे जनता बुरी तरह बोर होकर उकताने लगी।

वीआईपी कल्चर की इंतिहा: विधायक पुत्र के आते ही फिर शुरू हुआ माल्यार्पण

चाटुकारिता की सारी सीमाएं तब टूट गईं जब सांस्कृतिक कार्यक्रम बमुश्किल शुरू ही हो पाया था कि विधायक पुत्र मुकेश खंडेलवाल कार्यक्रम में देर से पहुंचे। उनके आते ही पालिका के जिम्मेदार सब कुछ भूल गए और बीच कार्यक्रम में प्रस्तुतियां रुकवाकर फिर से स्वागत की रस्में शुरू कर दी गईं। जनता के समय और आत्मसम्मान की ऐसी अनदेखी देखकर दर्शकों का सब्र टूट गया और लोग कुर्सियां छोड़कर उठने लगे।

🛑 माण्डलगढ़ दशहरा महोत्सव : कुप्रबंधन व फजीहत के मुख्य बिंदु

  • जनता के पैसों की बर्बादी: लाखों के टेंडर के बावजूद सांस्कृतिक स्तर और प्रबंधन शून्य।
  • माल्यार्पण का ड्रामा: रात 10 बजे तक सांस्कृतिक कलाकारों की जगह केवल कार्यकर्ताओं का स्वागत।
  • चाटुकारिता की पराकाष्ठा: विधायक पुत्र के देर से पहुंचने पर बीच कार्यक्रम में रोकी गईं प्रस्तुतियां।
  • सांस्कृतिक मर्यादा तार-तार: परिवार सहित बैठे दर्शकों के सामने मंच पर अश्लीलता परोसने से आक्रोश।
  • जनता का बहिष्कार: अपमान और बोरियत से तंग आकर खाली कुर्सियां छोड़ घर लौटे दर्शक।

मंच पर मर्यादाहीन प्रदर्शन, खाली कुर्सियों ने खोली पोल

रही-सही कसर कार्यक्रम के दौरान परोसी गई अश्लीलता ने पूरी कर दी। सांस्कृतिक मर्यादाओं की धज्जियां उड़ती देख परिवार सहित पहुंचे सभ्य नागरिकों ने मैदान से निकल जाना ही बेहतर समझा। देखते ही देखते पूरा पंडाल खाली हो गया और खाली कुर्सियां नगर पालिका के तथाकथित ‘सफल आयोजन’ के दावों का मुंह चिढ़ाती नजर आईं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब जनता के पैसों से उत्सव कराया जा रहा है, तो इसका मकसद आम जनता का स्वस्थ मनोरंजन होना चाहिए, न कि नेताओं के परिजनों की चापलूसी और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन। क्षेत्रवासियों ने स्वायत्त शासन विभाग और जिला कलेक्टर से इस पूरे आयोजन के टेंडर व खर्च की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।