माण्डलगढ़ में आरक्षण की लॉटरी ने बदले सियासी समीकरण, अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित
20 वार्डों में 11 अनारक्षित, 4 एससी, 4 ओबीसी और 1 एसटी वर्ग के खाते में; महिला दावेदारों की बढ़ी अहमियत, राजनीतिक दलों में टिकट को लेकर मंथन तेज
स्मार्ट हलचल संवाददाता
माण्डलगढ़, स्मार्ट हलचल। नगर पालिका चुनाव 2026 को लेकर माण्डलगढ़ में आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। नगर पालिका अध्यक्ष का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं 20 वार्डों की आरक्षण लॉटरी में अलग-अलग वर्गों के लिए सीटें तय होने के बाद चुनावी दावेदारों के समीकरण भी बदल गए हैं। अध्यक्ष पद के लिए अब राजनीतिक दलों को सामान्य वर्ग की महिला चेहरे को आगे करना होगा, जबकि वार्ड चुनाव में अलग-अलग आरक्षित वर्गों के दावेदारों की भी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
20 वार्डों का आरक्षण साफ, 11 वार्ड अनारक्षित
माण्डलगढ़ नगर पालिका के कुल 20 वार्डों में 7 वार्ड अनारक्षित सामान्य (ओपन) रखे गए हैं। इनमें वार्ड 2, 3, 5, 9, 12, 15 और 17 शामिल हैं। वहीं 4 वार्ड सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुए हैं। वार्ड 10, 14, 18 और 19 में सामान्य महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षण रहेगा।
अनुसूचित जाति वर्ग में कुल 4 वार्ड आरक्षित किए गए हैं। इनमें वार्ड 7, 8 और 20 एससी ओपन तथा वार्ड 16 एससी महिला के लिए आरक्षित है।
अनुसूचित जनजाति के लिए वार्ड 6 आरक्षित किया गया है, जबकि एसटी महिला के लिए कोई वार्ड आरक्षित नहीं हुआ है।
अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए भी कुल 4 वार्ड आरक्षित हुए हैं। इनमें वार्ड 1, 4 और 11 ओबीसी ओपन तथा वार्ड 13 ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है।
अध्यक्ष पद ने बदली चुनाव की पूरी दिशा
अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने के बाद माण्डलगढ़ की राजनीति में सबसे बड़ा बदलाव यह माना जा रहा है कि अब प्रमुख राजनीतिक दलों की रणनीति महिला चेहरे के इर्द-गिर्द केंद्रित होगी। लंबे समय से अध्यक्ष पद की दौड़ में सक्रिय पुरुष दावेदारों को अब सीधे मैदान में उतरने के बजाय अपनी राजनीतिक रणनीति बदलनी पड़ेगी।
हालांकि अध्यक्ष पद के लिए सामान्य महिला का आरक्षण होने का अर्थ यह नहीं है कि दावेदारी केवल वार्ड 10, 14, 18 और 19 तक सीमित रहेगी। सामान्य महिला उम्मीदवार अन्य ऐसे वार्डों से भी चुनावी मैदान में उतर सकती हैं, जहां महिला के चुनाव लड़ने पर आरक्षण की बाध्यता नहीं है। यही वजह है कि अब राजनीतिक दल वार्डवार मजबूत महिला चेहरों की तलाश के साथ-साथ उनके पारिवारिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव का भी आकलन करेंगे।
भाजपा-कांग्रेस में महिला चेहरों की तलाश होगी अहम
आरक्षण के बाद अब भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अध्यक्ष पद के लिए मजबूत सामान्य महिला प्रत्याशी तलाशने की होगी। माण्डलगढ़ की स्थानीय राजनीति में सक्रिय महिला नेताओं, पूर्व पार्षद परिवारों और प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों से जुड़े महिला चेहरों पर दलों की नजर रह सकती है।
अध्यक्ष पद का चुनाव केवल वार्ड जीतने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बोर्ड में बहुमत जुटाने और पार्षदों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की रणनीति भी निर्णायक होगी। ऐसे में प्रत्याशियों के चयन के साथ-साथ चुनाव बाद के समीकरणों पर भी राजनीतिक दलों को अभी से नजर रखनी होगी।
पुरुष दावेदारों के सामने नई चुनौती
अध्यक्ष पद सामान्य महिला होने से उन पुरुष नेताओं के राजनीतिक समीकरणों को झटका लगा है, जो लंबे समय से नगर पालिका की राजनीति में अध्यक्ष पद की उम्मीद लगाए बैठे थे। अब इन नेताओं के सामने अपनी पसंद के महिला उम्मीदवार को आगे बढ़ाने और वार्ड स्तर पर मजबूत टीम तैयार करने की चुनौती होगी।
दूसरी ओर, सामान्य महिला आरक्षण ने उन परिवारों और महिला नेताओं के लिए राजनीतिक अवसर बढ़ा दिए हैं, जो अब तक नगर पालिका की राजनीति में प्रत्यक्ष रूप से सामने नहीं थीं। आने वाले दिनों में अध्यक्ष पद के संभावित चेहरों को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर और तेज होने की संभावना है।
आरक्षण का पूरा गणित
माण्डलगढ़ नगर पालिका के 20 वार्डों में आरक्षण की तस्वीर इस प्रकार है:
- एससी ओपन — 3 वार्ड: 7, 8, 20
- एससी महिला — 1 वार्ड: 16
- एसटी ओपन — 1 वार्ड: 6
- एसटी महिला — 0 वार्ड
- ओबीसी ओपन — 3 वार्ड: 1, 4, 11
- ओबीसी महिला — 1 वार्ड: 13
- अनारक्षित ओपन — 7 वार्ड: 2, 3, 5, 9, 12, 15, 17
- अनारक्षित महिला — 4 वार्ड: 10, 14, 18, 19
इस तरह कुल 20 वार्डों में 9 वार्ड विभिन्न आरक्षित वर्गों के खाते में हैं, जबकि 11 वार्ड अनारक्षित वर्ग के हैं, जिनमें 7 सामान्य ओपन और 4 सामान्य महिला वार्ड शामिल हैं।
अब टिकट से लेकर बोर्ड तक शुरू होगा असली सियासी खेल
वार्ड आरक्षण और अध्यक्ष पद का आरक्षण सामने आने के बाद अब माण्डलगढ़ में चुनावी राजनीति का अगला चरण शुरू हो गया है। कौन-सा दल किस वार्ड में किस चेहरे पर दांव लगाता है और अध्यक्ष पद के लिए किस सामान्य महिला को आगे करता है, यह आने वाले दिनों में सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल रहेगा।
आरक्षण ने कुछ पुराने दावेदारों की राह मुश्किल की है तो कई नए चेहरों के लिए राजनीति का दरवाजा खोल दिया है। अब मुकाबला सिर्फ वार्ड जीतने का नहीं, बल्कि अध्यक्ष पद के लिए बहुमत का गणित साधने और पार्षदों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाने का भी होगा।
