मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग ने पकड़ा जोर, देशभर के 400 जिलों में सौंपे ज्ञापन

जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए देशव्यापी पहल, केंद्र एवं राज्य सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग

बांसवाड़ा/जयपुर, 22 अक्टूबर। स्मार्ट हलचल|जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के ऐतिहासिक बलिदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने और मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कराने की मांग को लेकर गुरुवार को देशव्यापी अभियान चलाया गया। राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद, वनवासी कल्याण आश्रम तथा संबंधित संगठनों की ओर से देशभर के 400 जिलों में ज्ञापन सौंपकर केंद्र एवं राज्य सरकारों का ध्यान इस महत्वपूर्ण मांग की ओर आकर्षित किया गया। राजस्थान में बांसवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों पर जिला कलेक्टरों एवं उपखंड अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन दिए गए।

ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम संबोधित किए गए। इनमें बांसवाड़ा जिले में स्थित ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने तथा इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्व के अनुरूप संरक्षण और विकास की ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की गई।

*गोविंद गुरु के नेतृत्व में जनजागरण और ऐतिहासिक बलिदान*

ज्ञापन में कहा गया कि मानगढ़ धाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। गोविंद गुरु के नेतृत्व में चले भगत आंदोलन ने जनजातीय समाज में सामाजिक सुधार, स्वाभिमान, एकता और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर अंग्रेजी शासन की गोलीबारी में बड़ी संख्या में जनजातीय महिला, पुरुष और बाल आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था।

यह बलिदान केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों के जनजातीय समाज की साझा ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। ज्ञापन में कहा गया कि मानगढ़ की गौरवशाली विरासत को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देकर स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान को उचित स्थान दिया जाना चाहिए।

*प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के दौरे का भी दिया हवाला*

ज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उन्होंने इसे राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के वीर एवं स्वाभिमानी समाज की साझा राष्ट्रीय विरासत के रूप में रेखांकित किया था। राष्ट्रपति द्वारा 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ धाम पहुंचकर जनजातीय बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित किए जाने का भी उल्लेख किया गया।

इसके साथ ही राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अनुशंसा तथा अगस्त 2022 में प्रस्तुत शोध-आधारित रिपोर्ट का हवाला देते हुए मानगढ़ पहाड़ी को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

*राजस्थान के कई जिलों में सौंपे गए ज्ञापन*

बांसवाड़ा में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान जनजातीय सुरक्षा मंच के प्रदेश संयोजक लालूराम कटारा, जिला अध्यक्ष लालशंकर निनामा, प्रांतीय सह हित रक्षा प्रमुख जगदीश वैष्णव, अधिवक्ता विवेक रावत, जिला संगठन मंत्री रमेशचंद्र चरपोटा, सह जिला संगठन मंत्री वालम गणावा सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, संत-महात्मा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस अवसर पर अधिवक्ता विवेक रावत ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

इसी क्रम में उदयपुर जिला कलेक्टर को भी ज्ञापन दिया गया। कुशलगढ़ में उपखंड अधिकारी के माध्यम से तथा राजस्थान के अन्य स्थानों पर भी मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग उठाई गई। बारां सहित विभिन्न क्षेत्रों में भी इस अभियान के माध्यम से जनजातीय बलिदान की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने पर जोर दिया गया।

*भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा मानगढ़*

ज्ञापन के माध्यम से अपील की गई कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने में अब और विलंब नहीं किया जाए। इसके संरक्षण, ऐतिहासिक तथ्यों के दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन और विकास के लिए ठोस योजना बनाई जाए। साथ ही जनप्रतिनिधियों, सामाजिक-धार्मिक संगठनों और समाज के सभी वर्गों से इस मांग के समर्थन में एकजुट होकर प्रयास करने का आह्वान किया गया।

आयोजकों के अनुसार, देशभर के 400 जिलों में ज्ञापन सौंपने की यह पहल जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलने से न केवल इस ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा की प्रेरणा भी मिलेगी।