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मसानिया भैरवनाथ मंदिर में दहकेगी चिता भस्म की होली, अनूठी परंपरा का साक्षी बनेगा पंचमुखी मोक्षधाम

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पंकज पोरवाल

भीलवाड़ा ।स्मार्ट हलचल|वस्त्रनगरी भीलवाड़ा के पंचमुखी मुक्तिधाम स्थित प्राचीन मसानिया भैरवनाथ मंदिर में इस वर्ष भी होली का पर्व बेहद अनूठे और आध्यात्मिक रूप में मनाया जाएगा। आगामी 2 मार्च को होलिका दहन के पावन अवसर पर यहाँ चिता भस्म से होली खेलने की सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। तंत्र साधना और अघोर परंपरा के प्रतीक भगवान भैरवनाथ के दरबार में होने वाला यह आयोजन प्रदेशभर में कौतूहल और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। श्री मसानिया भैरवनाथ विकास समिति के अध्यक्ष रवि कुमार सोलंकी ने बताया कि मंदिर में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात्रि 9.00 बजे निर्धारित किया गया है। इस दौरान पारंपरिक रूप से कंडों (उपलों) की होली जलाई जाएगी। दहन के पश्चात, मध्य रात्रि 12.00 बजे मुख्य आयोजन शुरू होगा, जिसमें श्रद्धालु और साधक ताजी चिता की भस्म से एक-दूसरे के साथ होली खेलेंगे। मसानिया भैरवनाथ मंदिर में चिता भस्म से होली खेलने की परंपरा पिछले कई दशकों से अटूट रूप से चली आ रही है। भगवान शिव और उनके अवतार भैरवनाथ को श्मशान का अधिपति माना जाता है। चिता की भस्म को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि भस्म से होली खेलना संसार की नश्वरता को स्वीकार करने और अहंकार को त्यागने का प्रतीक है। जहाँ सामान्य तौर पर लोग श्मशान जाने से कतराते हैं, वहीं इस दिन हजारों की संख्या में भक्त मुक्तिधाम पहुँचकर गुलाल की जगह चिता की राख से सराबोर होते हैं। यह आयोजन जीवन और मृत्यु के बीच के भय को समाप्त करने का संदेश देता है। अध्यक्ष सोलंकी के अनुसार, इस आयोजन की भव्यता हर साल बढ़ रही है। न केवल भीलवाड़ा बल्कि आस-पास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने पहुँचते हैं। मंदिर के पुजारी संतोष कुमार खटीक ने बताया कि इस आयोजन की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। उन्होंने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस महोत्सव में सम्मिलित होकर मसानिया भैरवनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें और इस प्राचीन परंपरा को सफल बनाएं। यह आयोजन भीलवाड़ा की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को दर्शाता है, जहाँ होली का उत्सव केवल रंगों तक सीमित न रहकर आध्यात्मिक गहराई तक उतर जाता है।

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