:- मेवाड़ केसरी पूज्य प्रवर्तक श्री मोहनलाल जी मसा का 39वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया, रवीन्द्र मुनि जी मसा के सानिध्य में हुआ आयोजन, 82 संघो के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
:- रविन्द्र मुनि को ओडाई आदर की चादर, युवा प्रणेता व क्रान्तिवीर पदवी से किया अलंकृत
राजेन्द्र बबलू पोखरना
कोटड़ी
स्मार्ट हलचल|मेंवाड़ का ऐतिहासिक धाम कोटड़ी श्याम परिसर में शीतल गच्छ के मेवाड़ केसरी पूज्य प्रवर्तक श्री मोहनलाल जी मसा का 39वां पुण्य स्मृति दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। कार्यक्रम मेवाड़ गौरव एवं प्रखर वक्ता रवीन्द्र मुनि जी मसा के सानिध्य में आयोजित हुआ जिसमें अनेक क्षेत्रों के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर गुरूदेव को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता मीठा लाल सिंघवी ने की। जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राजेन्द्र गोखरू, कंवर लाल सूर्या, लक्ष्मण सिंह बाबेल एवं धर्म चन्द रातड़िया उपस्थित रहे। वहीं विशेष वक्ता भूपेन्द्र पगारिया, चन्द्र सिंह खारीवाल, शिव पगारिया एवं सुशील आंचलिया कनेरा ने संतश्री के जीवन, व्यक्तित्व एवं धर्म प्रभावना पर विचार व्यक्त किए। वहीं निशा डांगी, ममता पोखरना, दिव्या रूगलेचा, अनिता सिंघवी ने मंगलाचरण तथा अनिता पोखरना, अंजू लोढ़ा, सुनिता पोखरना, सुलेखा पोखरना ने स्वागत गीत प्रस्तूत किया। वहीं श्रीवर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष निर्मल लोढ़ा, संरक्षक नवरतनमल पोखरना,सीमा डागा, विजय लक्ष्मी लोढ़ा, लक्ष्मी डांगी, श्रुति लोढ़ा, अविनाश लोढ़ा, सुरभी लोढ़ा, प्रथम जैन सहित अनेक क्षेत्रों के पदाधिकारियों ने संबोधित कर गुरू के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित कि। गुणानुवाद सभा का संचालन चातुर्मास समिति के अध्यक्ष शान्ति लाल पोखरना ने किया।
गुरु के बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि: रविन्द्र मुनि
गुणानुवाद सभा को संबोधित करते हुए मैंवाड़ गौरव प्रखर वक्ता रवीन्द्र मुनि जी मसा ने कहा कि संतों की स्मृति केवल किसी एक दिन को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का अवसर है। पूज्य प्रवर्तक श्री मोहनलाल जी मसा ने अपने जीवन में त्याग, तपस्या, संयम और मानव सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया। उनके विचार और संस्कार आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की पहचान उसके धन-दौलत से नहीं, बल्कि उसके विचार, व्यवहार और संस्कारों से होती है। गुरु के चरणों में सच्ची श्रद्धा तभी मानी जाएगी, जब हम उनके बताए सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारें। समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकता बनाए रखना तथा जरूरतमंदों की सेवा करना ही संतों के प्रति वास्तविक सम्मान है। आज मनुष्य भौतिक सुखों की दौड़ में मानसिक शांति खोता जा रहा है। ऐसे समय में संतों की वाणी जीवन को सही दिशा देने का कार्य करती है। धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने आचरण को शुद्ध करना, अहिंसा का पालन करना और दूसरों के प्रति करुणा रखना ही धर्म का वास्तविक स्वरूप है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संतों के जीवन और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर संस्कारवान समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि गुरु शरीर से भले ही हमारे बीच नहीं हों, लेकिन उनके विचार और आदर्श सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान समस्त संघों की ओर से आदर की चादर ओढ़ाते हुए रवीन्द्र मुनि को युवा प्रणेता, क्रांतिवीर की पदवी से भी अलंकृत किया गया।

