परिवादी श्योजीलाल गुर्जर ने बताया कि उनके दादा श्रीकिशन उर्फ श्रीया गुर्जर का निधन वर्ष 2001 में हो चुका था। लेकिन आरोपी प्रहलाद गुर्जर ने मृतक का फर्जी आधार कार्ड बनवाया और खुद ‘श्रीकिशन’ बनकर उप तहसील कार्यालय पहुँच गया।
वहां मिलीभगत से उसने:
- आधी जमीन देवराज गुर्जर के नाम कर दी।
- बची हुई आधी जमीन अपनी पत्नी बदाम देवी के नाम रजिस्टर करवा ली।
सिस्टम पर सवाल: फोटो किसी और की, नाम किसी और का
हैरानी की बात यह है कि रजिस्ट्री दस्तावेजों पर मृतक श्रीकिशन की जगह आरोपी प्रहलाद की फोटो लगी है, लेकिन उप पंजीयक (नायब तहसीलदार) और डीड राइटर भवानीशंकर रेगर ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों पर बैंक से लोन लेने की भी कोशिश की।
कोर्ट का डंडा चला तो निरस्त हुई रजिस्ट्री:
जब कलेक्टर और पुलिस ने सुनवाई नहीं की, तो पीड़ित ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश उनियारा के आदेश के बाद, नायब तहसीलदार बनेठा पूजा मीणा ने हरकत में आते हुए अब इस फर्जी विक्रय पत्र को शून्य (निरस्त) घोषित कर दिया है।
ईसरदा डैम के मुआवजे पर थी नजर
सूत्रों के मुताबिक, जिस जमीन का फर्जीवाड़ा हुआ, वह ईसरदा बांध (Isarda Dam) के डूब क्षेत्र में आती है। आरोपी इस जमीन का सरकारी मुआवजा हड़पना चाहते थे। उनियारा उपखण्ड में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने प्रशासन की कार्यशैली और ईमानदारी पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।


