नगर पालिका बनने के तीन वर्ष बाद भी मेड़ता रोड विकास से वंचित

गंदे नाले, टूटी सड़कें और जल निकासी की बदहाल व्यवस्था से जनता बेहाल

एजाज़ अहमद उस्मानी।

स्मार्ट हलचल।ग्राम पंचायत से क्रमोन्नत होकर नगर पालिका बने लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद मेड़ता रोड कस्बे में विकास कार्यों की स्थिति बेहद निराशाजनक बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पालिका बनने के बाद जिस तेज विकास की उम्मीद थी, वह आज तक धरातल पर नजर नहीं आ रही है। कस्बे की स्थिति को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि विकास के नाम पर मेड़ता रोड अब भी पिछड़ेपन की तस्वीर पेश कर रहा है। कस्बे के विभिन्न वार्डों में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। न तो नियमित रूप से साफ-सफाई व्यवस्था सुचारू है और न ही जल निकासी की कोई प्रभावी प्रणाली दिखाई देती है। बारिश के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब सड़कों पर गंदा पानी भर जाता है और कई मोहल्ले जलमग्न हो जाते हैं।

*मुख्य मार्गों पर गंदगी और जर्जर नाले*

कस्बे के मुख्य बस स्टैंड, मेड़ता सिटी मार्ग, नागौर सड़क मार्ग सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर नाले टूटे पड़े हैं। इन नालों से लगातार गंदा पानी बहकर सड़कों पर फैलता रहता है, जिससे न केवल दुर्गंध का माहौल बनता है बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। कई जगहों पर नाले खुले पड़े हुए हैं, जो राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय या कम रोशनी में इन खुले नालों में गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं, लेकिन नगर पालिका प्रशासन इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहा है।

*बाइपुरा क्षेत्र की हालत सबसे खराब*

कस्बे के बाइपुरा क्षेत्र की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई जा रही है। यहां न तो गंदे पानी की उचित निकासी व्यवस्था है और न ही सड़कें ठीक हालत में हैं। जगह-जगह गड्ढों और कीचड़ के कारण आमजन को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हल्की बारिश में ही सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को काफी दिक्कत होती है। कई बार शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

*विकास के दावे और जमीनी हकीकत में अंतर*

नगर पालिका बनने के बाद कस्बे में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन जमीनी स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि वास्तविकता में कई वार्ड आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि नगर पालिका प्रशासन द्वारा केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन स्थायी सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।

*जनता में बढ़ता आक्रोश*

कस्बे के लोगों में प्रशासन के प्रति लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि वे वर्षों से समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई लोगों ने इसे “सोतेला व्यवहार” बताते हुए कहा कि मेड़ता रोड के साथ विकास के नाम पर भेदभाव किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों ने सवाल उठाया है कि आखिर नगर पालिका बनने के बाद भी जब हालात नहीं बदले, तो इसका लाभ जनता को क्या मिला?

*जनता की प्रशासन से मांग*

लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि:
सभी प्रमुख मार्गों के टूटे नालों की तुरंत मरम्मत की जाए,
खुले पड़े नालों को ढककर सुरक्षा सुनिश्चित किया जाए,
बाइपुरा सहित सभी क्षेत्रों में सड़क निर्माण और सुधार कार्य किए जाएं,
नियमित सफाई व्यवस्था लागू की जाए,
जल निकासी की स्थायी योजना बनाई जाए,
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो जनआंदोलन की स्थिति भी बन सकती है।

*क्या चाहती है जनता*

मेड़ता रोड कस्बा आज विकास के दावों और वास्तविकता के बीच फंसा नजर आ रहा है। नगर पालिका बनने के तीन साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई और वास्तविक विकास चाहती है।