एजाज़ अहमद उस्मानी
स्मार्ट हलचल| मेरा शहर मेड़ता रोड राजस्थान के नागौर ज़िले में स्थित एक शांत, सरल और आत्मीय नगर है। यह शहर अपनी सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक सौहार्द और रेल संपर्क के लिए जाना जाता है। मेड़ता रोड भले ही आकार में बड़ा न हो, लेकिन यहाँ के लोगों के दिल बहुत बड़े हैं।
मेड़ता रोड का नाम सुनते ही सबसे पहले रेलवे जंक्शन का ध्यान आता है। यह शहर रेल मार्ग के कारण राजस्थान के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है, जिससे व्यापार और आवागमन में सुविधा होती है। रेलवे ने इस शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहां पर स्थित बृहमाणी माता मन्दिर,जैन समुदाय का पार्श्वनाथ तीर्थ स्थल,फ़ज़लुर्रहमान उर्फ चंगा बाबा की दरगाह शहर की हृदय स्थली पर बना जबरेश्वर महादेव मंदिर और बृहमाणी तालाब पर हाल ही में बना सर्वेश्वर महादेव मंदिर भी अपने आप में एक बड़ी मिसाल हैं।इन सभी स्थानों पर प्रदेशभर से प्रतिदिन हजारों लोग दर्शन करने आते हैं जिसके कारण शहर की रोनक और अधिक बढ़ जाती है।
यहाँ का जीवन सरल और सादा है। लोग एक-दूसरे को जानते हैं, सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं। सुबह की शुरुआत चाय की दुकानों की चहल-पहल से होती है और शाम को बाज़ारों में रौनक दिखाई देती है। यहाँ के बाज़ार छोटे होते हुए भी रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करते हैं।
मेड़ता रोड के लोग मेहनती और ईमानदार हैं। यहाँ विभिन्न समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं, जिससे भाईचारे की भावना मजबूत होती है। त्योहारों के समय शहर रंग-बिरंगी रोशनी और खुशियों से भर जाता है।
शिक्षा और जागरूकता भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। स्कूल तथा अन्य संस्थान बच्चों के भविष्य को संवारने में योगदान दे रहे हैं। हालाँकि शहर में अभी तक आगे की पढ़ाई के लिए कॉलेज नहीं है फिर भी यहां के बच्चे मेड़ता सिटी,जोधपुर, जयपुर,सीकर आदि जैसे बड़े शहरों में जाकर आगे की पढ़ाई कर रहे हैं।मेरा शहर पहले ग्राम पंचायत था लेकिन अभी हाल ही में लगभग दो वर्ष पूर्व यहां के स्थानीय विधायक लक्षमणराम कलरु ने मेरे शहर को नगर पालिका का दर्जा दिलवाया। हालांकि मेरे शहर में पहले विकास कम था लेकिन अब विकास धीरे धीरे विकास होने लगा है और आगे भी विकास की संभावनाएँ हैं, फिर भी मेड़ता रोड अपनी सादगी और अपनापन के लिए खास है।
कुल मिलाकर, मेड़ता रोड सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि लोगों की भावनाओं, रिश्तों और यादों का संगम है। मुझे अपने इस शहर पर गर्व है, क्योंकि इसकी मिट्टी में अपनापन और संस्कार बसे हुए हैं।


