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नाबालिग की बरामदगी को लेकर हाईकोर्ट सख्त, 3 फरवरी से पहले पेश करने के आदेश

पुलिस की लापरवाही से परेशान पिता ने खटखटाया न्यायालय का दरवाजा, हैबियस कॉर्पस पर सुनवाई

भीलवाड़ा। नाबालिग बेटी के लापता होने के मामले में पुलिस की उदासीनता से आहत एक पीड़ित पिता को आखिरकार राजस्थान उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। मामले में जोधपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नाबालिग लड़की को 3 तारीख से पहले कोर्ट में उपस्थित किया जाए। पीड़ित पिता ने बताया कि उन्होंने 26 अक्टूबर 2025 को रायला थाने में अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने गंभीरता से कार्रवाई करने के बजाय उन्हें लगातार थाने और दफ्तरों के चक्कर कटवाए। न तो बच्ची की प्रभावी तलाश की गई और न ही कोई ठोस प्रगति दिखाई दी।

एसपी से लेकर मुख्यमंत्री तक भेजे ज्ञापन

न्याय न मिलने से हताश पिता ने इस संबंध में जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम भी पत्र भेजकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन कहीं से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आखिरकार हार मानने के बजाय पीड़ित पिता ने उच्च न्यायालय में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की।

हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं ने रखा पीड़ित पक्ष

मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय के अधिवक्ता भैरूलाल जाट एवं जितेंद्र सिंह गौड़ ने मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि पुलिस की लापरवाही के कारण नाबालिग के जीवन और भविष्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। अब संबधित पुलिस अधीक्षक को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए है।

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