कुवांरी कन्याओं को कराया भोजन, पैर पूजकर दिए उपहार
नाहरगढ़, 27 मार्च |स्मार्ट हलचल|कस्बे सहित आसपास के इलाकों में नौ दिन से चल रहा भक्तिमय माहौल अंतिम दिन आस्था के सैलाव में बदल गया। मंदिरों में सुबह दुर्गा मां की अराधना हुई तो घरो में नवमी की पूजा की गई। मर्यादा पुरुषोतम राम, पवनपुत्र हनुमान सहित दुर्गा मां के के मंदिरों में भक्तो का दर्शनों के लिये तांता लगा रहा।
मीठी मनुहार, थोड़ा प्यार फिर आहार
लालकिला परिसर में नवरात्रा समापन पर्व पर देवीभक्तों के सहयोग से आयोजित सर्वजातीय नगर कन्याभोज में आमंत्रण व स्वेच्छा से मेजबान बने कस्बावासियो की मीठी मनुहार और प्यार से कस्बे के विभ्भिन मोहल्लो से माता के दरबार में पहुंची नन्हीं मुन्हीं कुवांरी बालिकायें अभिभूत थी। यहां
लगभग ग्यारह सौ बालिकाओं का भोजन कराके दान दक्षिणा देने की परंपरा सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल कायम की है।
स्नेह और विश्वास का गहरा रिश्ता कायम
सर्वजातीय नगर कन्याओं की भोजन की व्यवस्था यहां के करीब 50-60 सूचीबद्ध दानदाताओं के जिम्मे है। ऐसा लगता है देवी मां का रूप कुवांरी कन्याओं व मेजबान श्रद्धालुओं के बीच स्नेह और विश्वास का गहरा रिश्ता कायम हो गया। रिश्ते से जातिवाद दकियानूसी परम्पराओं की दीवारे ढह गई है। इस अभूतपूर्व आयोजन में कस्बावासी कन्याओं की पूंछ परख में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी तो कन्यायें बड़े चाव से भोजन कर रही थी। हम उम्र के बच्चे भोजन कराते समय अलग दोने में नमक रखना तक नहीं भूल रहे थे।
कुमकुम का तिलक, हाथ में दक्षिणा फिर छूये पैर
महिलाओं ने इन कुआंरी कन्याओं को भोज करवाकर कुमकुम का तिलक लगाकर हाथ में कुछ दान दक्षिणा देकर पैर छूये। इसी दिन मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।
नगर कन्या भोज की अनूठी मिसाल
रामनवमी पर हिन्दु धर्म की मान्यताओं के अनुसार कुवांरी व नन्ही बालिकाओं में स्वंय माता का वास होता है इसके चलते ही नवरात्रा के समापन के अवसर पर नगरवासियों की ओर से नगर कन्या भोज का आयोजन कर अनूठी मिसाल कायम की जाती है जो सराहनीय व प्रशंसनीय होती है। सायंकाल भक्तगण दुर्गा मां की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण कर आरती उतारी एवं समूचे राष्ट्र व सभी समाज के वर्गों में खुशहाली भाईचारा एवं प्रगति की अराधना की।
सिद्धीदात्री की पूजा के साथ व्रतोपवास रखा
नवरात्रा को पूर्णाहुति पर माता के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा अचना की गई। नवरात्रा स्थापना पर मिट्टी के पात्र में उगाए गए ज्वारो को महाआरती के दौरान माता को अर्पित किया गया। नवरात्र पर्व पर कई श्रद्धालुओं ने नौ दिन तक व्रतोपवास रखे। इस अवधि में साधकों ने घरों में शतचंडी व दुर्गासप्तमी का पाठ भी रखा वही श्रीराम के मंदिरों में महाआरती व हवन आदि आयोजित हुये रामभक्तों ने व्रतोपवास रखकर अपने इष्टदेव की अराधना की। मंदिरों व घरों पर विभ्भिन धार्मिक अनुष्ठान हुये। इसके चलते मंदिरों में देवी मां की प्रतिमाओं की नई चूनरी धारण कर माता को सोलह श्रृंगार कर श्रृंगारित किया गया। वहीं घर-घर में महागौरी का पूजन कर खीर हलवे का भोग लगाया। माता की पूजा कर खुशहाली की कामना की।
