शाहपुरा / कोटडी । कोटडी क्षेत्र के नंदराय में शर्मनाक और निंदनीय घटना देखने को मिली जहां पुलिस द्वारा जबरन आंदोलन स्थल खाली करवाया गया और नन्हे-मुन्ने बच्चों को लाठी के दम पर हटाया गया। यह दृश्य न केवल पीड़ादायक था, बल्कि शिक्षा, लोकतंत्र और इंसानियत—तीनों पर एक गहरा आघात है। जो बच्चे अपने शिक्षक के लिए, अपने भविष्य के लिए, शांतिपूर्ण तरीके से बैठे थे उन पर बल प्रयोग करना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। ग्रामीणों की साफ और सीधी मांग थी शंकर जाट का स्थानांतरण निरस्त किया जाए। बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिरता को सुरक्षित रखा जाए। लेकिन दुख इस बात का है कि स्थानीय प्रशासन ने जनभावना को समझने के बजाय, तानाशाही करने का काम किया है। नंदराय गांव में डर नहीं बल्कि दर्द और अपमान की भावना है। यह आंदोलन कोई अराजकता नहीं था, यह मांग न्यायपूर्ण,सीधी और मानवीय मांग थी— जिसे सुना जाना चाहिए था, दबाया नहीं जाना चाहिए था। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा की इस तरह का यह रवैया, दमन, और अनसुनी मांग नंदराय व क्षेत्र के लोग कभी नहीं भूलेंगे और इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।


