पैदल विहार करने वाले संतों के लिए बने राष्ट्रीय सुरक्षा निति, आवा जैन समाज ने उठाई उच्चस्तरीय जाँच की माँग

(हरि शंकर माली)

दूनी/टोंक। स्मार्ट हलचल।रीवा मध्य प्रदेश में तेज रफ्तार कार की टक्कर से विहाररत जैन आर्यिका माताजी और संघ की पूज्य आर्यिकाओं के असामयिक निधन यानी समाधि को लेकर जैन समाज में गहरा दुःख और आक्रोश है।
सुदर्शनोदय क्षेत्र प्रभारी आशीष जैन और रोहित जैन ने बताया कि इस दुःखद घटना के विरोध में सकल दिगंबर जैन समाज आंव टोंक ने स्थानीय तहसीलदार महोदय के माध्यम से भारत के माननीय प्रधानमंत्री, मध्य प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है, ज्ञापन में समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि घटना से जुड़े उपलब्ध तथ्यों और वीडियो क्लिपों को देखने के बाद पूरे समाज में गहरी आशंका और चिंता का माहौल बना हुआ है। जैन समाज ने इस पूरे मामले की एसआईटी या अन्य एजेंसियों से न्यायिक जाँच कराने की माँग की है। इसके साथ ही घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों को तुरंत सुरक्षित कर दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने तथा षड्यंत्र की पुष्टि होने पर सख्त धाराएं लगाने की माँग भी की गई है। जैन समाज ने शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसक और पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो किसी प्रकार के वाहन या सुरक्षा का उपयोग नहीं करते, ऐसे में उनके साथ लगातार हो रहीं दुर्घटनाएँ बेहद चिंताजनक हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।

समाज ने अपनी प्रमुख माँगों में विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक और हाईवे पर विशेष प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की माँग की है।
इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा पैदल विहार करने वाले संतों हेतु राष्ट्रीय सुरक्षा गाइडलाइन (SOP) तथा संवेदनशील मार्गों हेतु विशेष कानूनी प्रावधान बनाकर राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति का निर्माण करने की बात कही गई है, चूंकि साधु-संत अपनी आत्मरक्षा नहीं करते और पूर्णतः अहिंसक जीवन जीते हैं, इसलिए उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों व दुर्घटनाओं को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखकर त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की माँग रखी गई है. साथ ही, स्थानीय स्तर पर प्रशासन और जैन समाज के बीच एक ‘संत सुरक्षा समन्वय सेल’ और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था बनाने का आग्रह किया गया है।

ज्ञापन सौंपते समय समस्त जैन समाज और संचालक मंडल के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव पैदा करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना और तपस्वी संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। समाज का मानना है कि संत सुरक्षा केवल एक समाज का विषय नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत की सुरक्षा का प्रश्न है. समाज ने उम्मीद जताई है शासन-प्रशासन इस विषय को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कदम उठाएगा।