अध्यात्म, सनातन और समरसता का दिखेगा विराट रूप
गांव-गांव से उमड़ेगा भगवा सैलाब, बनेगा ऐतिहासिक क्षण
साध्वी सरस्वती दीदी का दिव्य संदेश, स्वाती मिश्रा की भजन संध्या, शाहपुरा बनेगा नववर्ष स्वागत का आध्यात्मिक धाम
शाहपुरा । मूलचन्द पेसवानी
हिंदू नववर्ष यानी नवसंवत्सर के पावन अवसर पर इस बार शाहपुरा अध्यात्म, सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता के रंग में पूरी तरह रंगने जा रहा है। 19 मार्च गुरुवार को नगर में एक भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक कलश यात्रा एवं शाही शोभायात्रा का आयोजन होगा, जिसे लेकर पूरे शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक उत्साह चरम पर है।
हिंदू नववर्ष समाजोत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित इस विराट आयोजन में करीब 20 हजार श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना जताई जा रही है। आयोजन को सफल बनाने के लिए पिछले एक माह से गांव-गांव बैठकों और घर-घर संपर्क अभियान के माध्यम से वातावरण तैयार किया गया है। यही कारण है कि शाहपुरा इस बार केवल नववर्ष नहीं मना रहा, बल्कि अपनी सनातन परंपरा के गौरव को पुनर्जीवित करने जा रहा है।
नवसंवत्सर भारतीय संस्कृति का वह स्वर्णिम अध्याय है, जहां से सृष्टि के सृजन का प्रारंभ माना जाता है। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि नवचेतना, नवऊर्जा और नवसंस्कारों का पर्व है। सनातन धर्म में इसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के संतुलन की दिशा में पहला कदम माना गया है। ऐसे में शाहपुरा में आयोजित यह शोभायात्रा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक बन रही है।
सुबह 9 बजे सीनियर हायर सेकेंडरी स्कूल से प्रारंभ होने वाली यह कलश यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों—वेलकम होटल, बेगू चौराहा, उदयभान गेट, कालिंजरी गेट, बालाजी की छतरी और मुख्य बाजार होते हुए पुनः स्कूल परिसर में पहुंचेगी। पूरे मार्ग में श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आएंगे, वहीं जगह-जगह पुष्प वर्षा और जल सेवा के माध्यम से स्वागत की तैयारी की जा रही है।
इस शोभायात्रा की सबसे खास बात होगी 11000 महिलाओं द्वारा सिर पर सजाए गए कलश, जो श्रद्धा, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक होंगे। साथ ही 300 तलवारों की शस्त्र वाहिनी सनातन धर्म की वीरता और सुरक्षा के संकल्प को प्रदर्शित करेगी। इसके अलावा 108 आकर्षक झांकियां भारतीय संस्कृति, देवी-देवताओं और ऐतिहासिक प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगी।
आयोजन समिति के डॉ. पुष्कर राज मीणा, द्वारका प्रसाद जोशी, हनुमान धाकड़ और सुमित पारीक ने पत्रकार वार्ता में बताया कि यह आयोजन शाहपुरा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा। उन्होंने सभी नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे इस यात्रा का स्वागत पुष्प वर्षा से करें और श्रद्धालुओं के लिए शीतल जल की व्यवस्था करें।
अध्यात्म की दृष्टि से यह आयोजन आत्मशुद्धि और समाजशुद्धि का संदेश देता है। जब हजारों लोग एक साथ “जय श्रीराम” और “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ निकलेंगे, तो वह केवल ध्वनि नहीं होगी, बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा, जो पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक शक्ति से भर देगा।
अपराह्न 1 बजे अंतरराष्ट्रीय कथावाचक साध्वी सरस्वती दीदी का उद्बोधन होगा, जिसमें वे नवसंवत्सर के आध्यात्मिक महत्व और सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालेंगी। वहीं रात्रि 7:30 बजे विश्व विख्यात गायिका स्वाती मिश्रा द्वारा “एक शाम प्रभु श्रीराम के नाम” भजन संध्या का आयोजन होगा, जो भक्तों को भक्ति रस में सराबोर कर देगा।
शाहपुरा में यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का भी संदेश है, जहां हर वर्ग, हर समाज और हर आयु वर्ग के लोग एक मंच पर आकर अपनी संस्कृति का उत्सव मनाएंगे।
निस्संदेह, 19 मार्च का यह दिन शाहपुरा के लिए केवल नववर्ष का आगमन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण और आध्यात्मिक चेतना के नवप्रवाह का प्रतीक बनकर इतिहास में दर्ज होगा। इसी उत्साह और आध्यात्मिक उमंग के बीच पूरे शाहपुरा नगर को नवसंवत्सर के स्वागत में दुल्हन की तरह सजाया गया है। नगर के प्रमुख मार्गों, चौराहों, कलश यात्रा के निर्धारित रूट और सीनियर हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर को आकर्षक भगवा पताकाओं से सुसज्जित किया गया है। हर गली-मोहल्ले में लहराती भगवा ध्वजाएं जहां सनातन संस्कृति की गरिमा को दर्शा रही हैं, वहीं वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना रही हैं।
मुख्य बाजार, बेगू चौराहा, उदयभान गेट, कालिंजरी गेट और बालाजी की छतरी सहित संपूर्ण यात्रा मार्ग पर विशेष सजावट की गई है। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए हैं, जिन पर धार्मिक व सांस्कृतिक संदेश अंकित हैं। भगवा रंग से सराबोर यह साज-सज्जा न केवल श्रद्धालुओं के उत्साह को बढ़ा रही है, बल्कि पूरे शहर में नववर्ष के आगमन की भव्यता को भी प्रदर्शित कर रही है।
हायर सेकेंडरी स्कूल, जहां से कलश यात्रा का शुभारंभ होगा, वहां विशेष रूप से भव्य मंच और धार्मिक प्रतीकों के साथ सजावट की गई है। पूरे परिसर को भगवा ध्वजों, फूल-मालाओं और आकर्षक लाइटिंग से सुसज्जित किया गया है, जिससे यह स्थल एक आध्यात्मिक तीर्थ जैसा प्रतीत हो रहा है।
नगरवासियों का कहना है कि इस प्रकार की एकजुटता और सजावट वर्षों बाद देखने को मिल रही है, जो यह दर्शाती है कि शाहपुरा अब अपनी सनातन संस्कृति और परंपराओं के प्रति और अधिक जागरूक और समर्पित हो रहा है।
