दूसरी लहर में दहशत बनी मौत का कारण लापरवाही और दहशत बनी मौत का कारण

दूसरी लहर में दहशत बनी मौत का कारण

लापरवाही और दहशत बनी मौत का कारण

✍️ज्योतिषाचार्य सरस्वती देवकृष्ण गौड़
(सामाजिक एवं राजनैतिक विश्लेषक)

जयपुर। सुख और दुःख कोई भी स्थिर नहीं है,ये आपदा भी चली ही जाएगी इस सकारात्मक सोच को अपना कर एवं धैर्यता का दामन थामकर एक दूसरे के हौसलों को बढ़ाना है।सत्य ये ही है कि दृढनिश्चय हो तो असम्भव कुछ भी नहीं…)
सबकुछ सामान्य हो चला था।जीवन की चहलपहल धीरे धीरे पहले की भांति लौटने लगी थी तभी अचानक से कोरोना की दूसरी लहर अप्रत्याशित आफत बनकर टूट पड़ी।लगभग एक वर्ष बाद भी कोविड 19 की गुत्थी पूर्ण रूप से अभी तक सुलझ नहीं पाई थी तबतक इसका प्रकोप दुबारा सामने आ खड़ा हुआ।इसके सटीक कारण और सटीक निदान अभी तक सामने नहीं आ पाए थे लेकिन वैक्सीन के रूप में एक बड़ी सफलता जरूर हाथ लगी थी जिससे कोरोना से बचने की एक संभावना जगी थी।अभी तक वैक्सीन का प्रथम चरण भी पूर्ण होना शेष था तबतक कोरोना का कहर पुनः टूट पड़ा।इस बार कोविड 19 ने सम्भलने तक का वक्त नहीं दिया और अचानक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करते हुए मौत के आंकड़े को बढ़ाना शुरू कर दिया।
इस तरह लगातार मौत के आंकड़े सामने आने पर भी लोगों ने इसे गम्भीरता से लेना जरूरी नहीं समझा परिणामस्वरूप भारत के अधिकांश भाग में ये संक्रमण की तरह शीघ्रता से फैलता चला गया।
कोविड 19 की दूसरी लहर अप्रत्याशित जरूर रही है लेकिन अचानक इस प्रकार बढ़ते आंकड़े कोविड से ज्यादा इसके प्रति हुई लापरवाही को इंगित कर रहे है।लापरवाही जनता की हो,प्रशासन की हो अथवा सरकार की हो लेकिन ये सच है लापरवाही इसका एक बड़ा कारण रही है।
संक्रमित होने वाले लोगों में मृत्यु के आंकड़े जिस प्रकार सामने आए उससे लोग एक हताहत की स्तिथि में जाने लगे।अपने आसपास के लोगों, अपने मित्रों,अपने जानकार व्यक्तियों आदि की हुई कोविड से मृत्यु की खबर से स्वस्थ्य व्यक्ति भी घबराहट से चिंतिंत और भयभीत होने लगा।
दूसरी लहर ने देशभर में एक भय का वातावरण सा बना दिया।जबकि सच्चाई ये है कि जिनको कोविड हुआ वो संक्रमण की वजह से कम लेकिन भय की वजह से अधिक मृत्यु को प्राप्त हो रहे है।
प्रचलित एक कहावत है कि “होनी को कोई नहीं टाल सकता”। लेकिन निराशा को आशा में बदला जा सकता है।दृढ़ इच्छाशक्ति से कितनी ही लाईलाज बीमारी को ठीक होते देखा गया है।
एक स्वस्थ व्यक्ति को भी यदि निराशा घेर ले तो कुछ समय बाद वो अवसाद का शिकार होकर रोगी सा बन जाता है।ऐसा ही कुछ वर्तमान स्तिथि में हो रहा है। पिछले वर्ष कोविड एक बड़ी महामारी के रूप में सामने आया था लेकिन उसका सामना सबने बड़ी हिम्मत और धैर्यता से मिलकर किया था तभी इस अनदेखी जंग को जीतने में भारत काफी हद तक सफल भी हो पाया था।आज तो इस जंग से जीतने के कितने ही हथियार हमारे सामने है।
कोरोना को हराने का सबसे बड़ा हथियार इससे बचकर रहना है।कोविड 19 के संक्रमण का खतरा उतना बड़ा नहीं है जितना धैर्य को खो देना एवं समय पर प्राथमिक उपचार शुरू ना कर पाना है।
पिछले वर्ष की भांति कोविड की इस दूसरी लहर में भी एक दूसरे के प्रति भरपूर सहयोग की आवश्यकता है। मानवता का परिचय देते हुए एक दूसरे का सहारा बनने की जरूरत है। लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण सच ये भी सामने आया है कि कोविड की इस दूसरी लहर में लोगो ने आपदा को अवसर में बदलने के लिए मानवता तक को ताक पर रख दिया है।अचानक कालाबजारी बढ़ गई है।कही ऑक्सीजन सिलेंडर की मारामारी देखने को मिल रही है तो कही बेड देने में भेदभाव नजर आ रहा है।एक तरफ आर्थिक स्तिथि वैसे ही असंतुलित थी ऐसे में कोविड से सम्बंधित दवाइयों को स्टोर करके रखने एवं हॉस्पिटल के बिल को कई गुना बढ़ाकर आम आदमी की पहुंच से बाहर कर दिया गया है।इन सबका परिणाम ये हुआ कि संक्रमित व्यक्ति इलाज के अभाव में मौत की चपेट में जाने लगा।
लेकिन इन सबसे अधिक खतरा कोविड के विषय पर नकारात्मक सूचनाओं को प्रसारित करना रहा है।दूसरी लहर से अचानक हुई मौत का आंकड़ा जो अबतक सामने आया है यदि गौर से इस पर विचार किया जाए तो भारत की जनसंख्या का मात्र आधा प्रतिशत भी नहीं होगा।मृत्यु के इतने आंकड़े देशभर के हॉस्पिटल्स एवं दुर्घटनाओं के निकाले जाए तो वो भी उससे कम ही होंगे।लेकिन जिस प्रकार भय का वातावरण फैलाया जा रहा है उससे ये आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।
आज जरूरत है एक दूसरे को धैर्य बंधाने की।कोरोना का इलाज भले की सम्भव नहीं हो पाया हो लेकिन इसका बचाव जरूर सम्भव हो पाया है।सार्वजनिक स्थलों से पूर्णतया दूरी बना लेने,अति आवश्यक कार्यों के समय ही घर से बाहर निकलने, मास्क का निरन्तर उपयोग करने,समय समय पर हाथों को सेनेटाइज करने,भाप का प्रयोग,योग,संतुलित आहार ग्रहण करने,काढ़ा,हल्दी दूध,गर्म पानी जैसे विभिन्न घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार अपना लेने से न केवल कोविड के संक्रमण से पूर्ण रूप से बचा जा सकता है बल्कि संक्रमित मरीज को भी शीघ्र स्वस्थ किया जा सकता है।
कोविड 19 की दूसरी लहर का सामना यदि धैर्यता,समझदारी,सूझबूझ और एक दूसरे के सहयोग को ध्यान में रखकर मिलकर किया जाए तो इसे हरा पाना उतना भी मुश्किल नहीं है।
सुरक्षा के उपाय,समय पर ईलाज और वैक्सीन के रूप में इस जंग से लड़ने की एक छोटी सी सफलता मिली भी है,अब बारी है स्तिथि सामान्य होने तक प्रत्येक व्यक्ति को लोक डाउन के सख्ती से पालन करने की।लॉक डाउन का सख्ती से पालन करना ही इस बढ़ती हुई ख़ौफ़ की लहर को रोक पाने में सम्भव हो पायेगा।
इन विपरीत परिस्थितियों में इस महत्वपूर्ण बिंदु पर विचार करने की अतिआवश्यकता है कि चुनाव की रैलियां, विवाह की तैयारियां,सार्वजनिक समारोह,बाजार की भीड़,आवागमन की जरूरत,व्यापार-कारोबार एवं अन्य महत्वपूर्ण कार्य के बिना भी कुछ समय तक जीवन चल सकता है लेकिन जीवन ही सुरक्षित ना रहा तो जीवनभर की इकट्ठी की गई दौलत उस जीवन को बचा पाने में कामयाब नहीं हो पाएगी।
कोविड 19 की इस दूसरी लहर में सिर्फ और सिर्फ जीवन को सबसे महत्व देकर इससे बचने का हर सम्भव प्रयास किया जाए।परिवर्तन प्रकृति का नियम है।सुख और दुःख कोई भी स्थिर नहीं है,ये आपदा भी चली ही जाएगी इस सकारात्मक सोच को अपना कर एवं धैर्यता का दामन थामकर एक दूसरे के हौसलों को बढ़ाना है।सत्य ये ही है कि दृढनिश्चय हो तो असम्भव कुछ भी नहीं।