पड़ोसी प्रथमः भारत ने विकास कार्यों के लिए भूटान को सौंपे 42 करोड़ रुपये

शाश्वत तिवारी

थिम्पू। स्मार्ट हलचल|भारत ने अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति पर चलते हुए पड़ोसी मित्र देश भूटान को विभिन्न डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए 42 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है। भारत द्वारा दी गई इस धनराशि से भूटान में खुरु-कुएनफेन पुल का निर्माण, रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आरआईएम) परिसर का अपग्रेडेशन और अन्य विकास कार्य कराए जाएंगे।
भूटान स्थित भारतीय दूतावास और भूटान की शाही सरकार के बीच थिम्पू में आयोजित 17वीं मासिक समन्वय बैठक में भारतीय दूतावास के उप-मिशन प्रमुख ने भूटान के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को 42.3 करोड़ रुपये के चेक सौंपे।
भारतीय दूतावास ने एक बयान में कहा यह राशि भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए दी गई है। इनमें झुंग द्रातशांग (केंद्रीय मठ निकाय) के लिए बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने और अन्य डेवलपमेंट्स के लिए 16.86 करोड़ रुपये जारी किए गए। बाजो-खुरु एसएनएच पर एक आधुनिक और उच्च मानक वाले खुरु-कुएनफेन पुल के निर्माण के लिए 15.01 करोड़ रुपये जारी किए गए।
दूतावास ने कहा इसमें योंगकोला-लिंगमेथांग पीएनएच का अपग्रेडेशन भी शामिल है, जिसके लिए 17 किलोमीटर लंबी सड़क को ‘प्राइमरी नेशनल हाईवे’ के मानक तक अपग्रेड करने के लिए 5.44 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। वहीं रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में भौतिक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास के लिए 4.99 करोड़ रुपये दिए गए हैं। भारतीय दूतावास ने यह भी बताया कि इस दौरान दोनों पक्षों ने 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत भारत सरकार द्वारा समर्थित तमाम परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और उनके कार्यान्वयन से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर बल दिया।
बता दें कि भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत भूटान की विभिन्न क्षेत्रों में लगातार मदद करता रहा है। दोनों पक्ष विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी का भी निरंतर विस्तार कर रहे हैं। इस बीच विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (उत्तर) मनु महावर भूटान के दौरे पर हैं और उन्होंने 7 मार्च को भूटान के विदेश मंत्री ल्योनपो डी. एन. धुंग्येल और विदेश सचिव पेमा एल. दोरजी से मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों पक्षों ने भारत-भूटान संबंधों की नींव में निहित विश्वास की सराहना की और आपसी प्राथमिकता वाले विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी के विस्तार पर विचारों का आदान-प्रदान किया।